जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आगामी 30 तारीख को नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री पद ग्रहण करने के शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देश पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को भले ही आमंत्रित नहीं किया गया हो, लेकिन इन दोनों नेताओं के बीच जल्द मुलाकात की संभावना बनी हुई है।

यह मुलाकात शपथ ग्रहण के दो हफ्ते बाद ही यानी 13-14 जून, 2019 को किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिशकेक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में संभव हो सकती है। वैसे भारतीय विदेश मंत्रालय के अभी तक के मूड को देखते हुए इस बात के आसार कम ही हैं कि दोनो नेताओं के बीच कोई औपचारिक मुलाकात होगी लेकिन भारत व पाकिस्तान के रिश्तों को देखते हुए अनौपचारिक तौर पर होने वाली मुलाकात का भी महत्व होता है।

एससीओ की वर्ष 2015 की ऐसी ही शीर्ष स्तरीय बैठक में मोदी और पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ की अनौपचारिक मुलाकात हुई थी। और इसने रिश्तों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। मोदी और शरीफ की मुलाकात के कुछ ही हफ्ते बाद बैंकाक में दोनो देशों के विदेश सचिवों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की बैठक हुई और द्विपक्षीय वार्ता का दौर शुरू करने पर सहमति बनी।

इसके बाद पीएम मोदी ने नवाज शरीफ के जन्मदिन के अवसर पर लाहौर (पाकिस्तान) की यात्रा भी की। लेकिन पठानकोट में हुए आतंकी हमले ने रिश्तों में सुधार की गाड़ी को पटरी से उतार दिया। उसके बाद रिश्ते बद से बदतर होते गये।

एससीओ में दोनो प्रधानमंत्रियों की मुलाकात की उम्मीद इस बात से भी बनी है कि ठीक एक हफ्ते पहले बिशकेक में ही एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में सुषमा स्वराज और पाक के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी की मुलाकात हुई। इसके बारे में भारत ने कहा कि यह आधिकारिक मुलाकात नहीं थी बल्कि सारे सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हुई सामान्य शिष्टाचार मुलाकात थी, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से ऐसा दिखाया गया कि मुलाकात औपचारिक से आगे की थी और इसमें द्विपक्षीय रिश्तों पर बात भी हुई।

पाकिस्तान पहले भी कई बार कह चुका है कि भारत में आम चुनाव के बाद द्विपक्षीय वार्ता शुरू होने के आसार हैं। इमरान खान ने तो यहां तक कहा था कि मोदी के दोबारा पीएम बनने से रिश्तों में सुधार की ज्यादा गुंजाइश है।

सनद रहे कि भारत और पाकिस्तान पिछले वर्ष ही एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य बने हैं। इसकी परिकल्पना चीन और रूस ने की थी। इन चारों देशों के अलावा उजबेकिस्तिान, ताजिकिस्तान, किर्गिजस्तान, कजाखस्तान इसके पूर्ण कालिक सदस्य हैं। ईरान, मंगोलिया, अफगानिस्तान और बेलारुस आब्जर्बर देश हैं जिन्हें पूर्णकालिक सदस्य बनाया जा सकता है।

अर्मेनिया, नेपाल, श्रीलंका, तुर्की, कंबोडिया, अजरबेजान को वार्ता साझेदार के तौर पर रखा गया है। अपनी रणनीतिक व ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए भारत इस संगठन को तवज्जो देने लगा है। भारत मध्य एशियाई देशों के बाजार में भी बड़ी हिस्सेदारी चाहता है। बिशकेक में होने वाली शीर्ष नेताओं की बैठक में मोदी की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से होने के आसार हैं।

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Posted By: Tanisk

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