नई दिल्ली, एजेंसीअंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बने पाकिस्तान की पुलवामा हमले के बाद अब मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। पुलवामा के बाद भारत की कूटनीतिक सक्रियता ने पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने अलग-थलग कर दिया है। अब पाक का हाल ये है कि भारत की सक्रियता से उसे फाइनेंशिएल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की तरफ से ब्लैक लिस्टेट किए जाने का डर सताने लगा है।

पिछले कुछ वक्त में पहले PM इमरान खान, फिर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी और अब वहां के एक राज्य मंत्री ने इस बात की आशंका जताई है कि पाकिस्तान पर एफएटीएफ (FATF) की सख्ती हो सकती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टेररिस्ट फंडिंग की निगरानी व उसे रोकने के लिए स्थापित एजेंसी एफएटीएफ (FATF) की जांच चल रही है और उसके आधार पर पेरिस स्थित यह एजेंसी सितंबर में पाकिस्तान के वित्तीय लेन देन पर प्रतिबंधित लगाने का ऐलान कर सकती है।

दरअसल, इस बैन की आशंका पर पाकिस्तान सरकार किस हद तक डरी हुई है इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि PM इमरान की अगुवाई में इसका हल निकालने के लिए रोजाना बैठकें हो रही हैं। दरअसल, भारत को लगता है FATF की तरफ से पाकिस्तान को 'ब्लैक लिस्ट' करना एक अहम सबक हो सकता है। यही वजह है कि विदेश मंत्रालय FATF में पाकिस्तान के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने को तैयार है।

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों को दी जाने वाली मदद में कोई कमी नहीं आई है। आतंकियों को बचाने को लेकर ना तो उसका रवैया बदला है और ना ही आतंकी ढांचे को रोकने के लिए उसकी तरफ से कोई नया कदम उठाया गया है।

PM खान व विदेश मंत्री कुरैशी यह स्वीकार कर चुके हैं कि अगर FATF की तरफ से उनके देश को 'ब्लैक लिस्ट' किया जाता है तो उससे उन्हें तकरीबन 10 अरब डॉलर सालाना का नुकसान होगा।

 

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