नई दिल्ली, जेएनएन। तालिबान के साथ लड़ाई बढ़ते देख भारत, अफगानिस्तान सरकार को सैन्य मदद भेजेगा या नहीं, इस पर भारत ने कूटनीतिक चुप्पी साधी हुई है। इन संभावनाओं को भारत न तो खारिज कर रहा है और न ही स्वीकार कर रहा है। इसे भारत के रवैये में एक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि भारत अभी तक अफगानिस्तान को सैन्य मदद देने के सवालों को एक सिरे से खारिज करता रहा है।

सैन्य सहयोग पर बातचीत संभव

अफगानिस्तान सेना के प्रमुख अगले कुछ दिनों में भारत के दौरे पर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि उनकी नई दिल्ली में सैन्य सहयोग को लेकर बातचीत होगी। क्या भारत अफगान को सैन्य मदद देने जा रहा है। यह सवाल गुरुवार को जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से पूछा गया तो उनका जवाब था कि भारत व अफगान के रिश्ते इनके बीच अक्टूबर, 2011 में हुए रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हुए हस्ताक्षर से तय होते हैं।

अफगानिस्तान के विकास में मदद करेगा भारत

एक पड़ोसी देश होने के नाते भारत अफगानिस्तान सरकार व वहां की जनता को एक शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक व समृद्ध भविष्य बनाने में मदद देता है ताकि वहां के समाज के महिलाओं व अल्पसंख्यकों समेत हर वर्ग के हितों की रक्षा हो सके। वर्ष 2020 में जेनेवा में हुई अफगानिस्तान कांफ्रेंस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के विकास को लेकर भारत ने अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।

अभी तक इस रुख पर कायम

साफ है कि बागची ने यह नहीं कहा कि भारत अफगानिस्तान को सैन्य मदद नहीं देगा। भारत अभी तक यही कहता रहा है कि वह अफगानिस्तान के सिर्फ विकास कार्यों और प्रशासन चलाने में मदद देने की नीति पर चलता है।

अभी कुछ भी साफ नहीं

दैनिक जागरण ने यही सवाल कुछ दिन पहले अफगानिस्तान के नई दिल्ली स्थित राजदूत फरीद मामुंदजई से पूछा तो उनका जवाब था कि अभी भारत से सैन्य मदद की जरूरत नहीं है क्योंकि अमेरिकी सेना की तरफ से कुछ साजो सामान व हथियार हमें मुहैया कराये गये हैं लेकिन हो सकता है कि अमेरिकी सेना की पूरी वापसी के बाद यह मदद न मिले तब हमें भारत से सैन्य मदद चाहिए। भारत को वहां अपनी सेना भेजने की जरूरत नहीं है लेकिन एक साथ कई आतंकी संगठनों से लंबे समय तक लड़ने के लिए हमें हेलीकाप्टर, हथियार व दूसरे साजों सामान चाहिए।

सैन्‍य मदद की होगी जरूरत

वहीं जानकारों का कहना है कि पूर्व में भी भारत ने अफगानिस्तान के सैनिकों को प्रशिक्षण दिया है और कुछ हेलीकाप्टर भी उपलब्ध कराये हैं। अभी अफगानिस्तान को सबसे ज्यादा हेलीकाप्टरों व विमानों की जरूरत है। माना जाता है कि इनके बगैर तालिबान की बढ़ते कदम को रोकना मुश्किल होगा।