नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। स्विटजरलैंड के दावोस शहर में विश्व आर्थिक मंच की शीतकालीन बैठक आयोजित होने जा रही है, जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिरकत करेंगे। दावोस आर्थिक जगत में अहम शहर होने के साथ ही एक खूबसूरत शहर भी है। इस शहर में दुनिया भर से हजारों लोग जुटेंगे, जिसमें डब्ल्यूटीओ, आईएमएफ और विश्व बैंक सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 38 प्रमुख, कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और विभिन्न देशों की 2,000 कंपनियों के सीईओ भी यहां मौजूद रहेंगे।

दावोस में फोरम से सड़कों तक बस इंडिया ही इंडिया

पांच दिन तक चलने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मेजबानी कर रहा स्विट्जरलैंड का शहर दावोस विश्वभर की दिग्गज शख्सियतों के स्वागत सत्कार में लगा हुआ है। मेडिकल टूरिज्म और स्कीइंग के लिए मशहूर दावोस 48वीं बार इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। दुनिया भर के बड़े-बड़े नेता, इन्वेस्टर्स और बिजनेस लीडर्स का केन्द्र बने दावोस शहर की दीवारें भारतीय कंपनियों के विज्ञापनों से पटी पड़ी हैं। तो आइए जानते हैं कितना खास और खूबसूरत है ये शहर...

दावोस लैंड वासर नदी के तट पर स्थित स्विटजरलैंड का खूबसूरत शहर है। यह शहर दोनों ओर स्विस आल्प्स पर्वत की प्लेसूर और अल्बूला श्रृंखला से घिरा हुआ है। यहां पर दावोस बैठक हर साल होती है। दावोस की जनसंख्या सिर्फ 11,000 है। यह शहर यूरोप में सबसे ऊंची जगह पर बसा हुआ है।

दावोस सम्मेलन को एलीट क्लास के सम्मेलन के रूप में देखा जाता है। दावोस में सरकारी और गैर-सरकारी व्यक्ति और संगठन एक साथ मिलकर वैश्विक विकास के लिए फैसले लेते हैं। साल के अंत में यहां पर स्पेंगलर कप आइस हॉकी टूर्नामेंट का भी आयोजन किया जाता है।

जर्मनी के बिजनसमैन प्रफेसर क्लौस श्वाब ने 1971 में स्विटजरलैंड के शहर दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के सम्मेलन की शुरुआत की थी। इसका मकसद यूरोपीय देशों के बड़े उद्योगपतियों को अमेरिकी उद्योगपतियों से कुछ सीख देने का था। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड के जिनेवा में है। स्विस अधिकारियों द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में मान्यता मिली हुई है। इनका मिशन विश्व के व्यवसाय, राजनीति, शैक्षिक और अन्य क्षेत्रों मेंअग्रणी लोगों को एक साथ लाकर वैश्विक, क्षेत्रीय और औद्योगिक विकास को बढ़ाना है।

देश के एक फीसद अमीरों के हिस्से आया 73 फीसद सर्जित धन

स्विटजरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूह ऑक्सफैम ने दुनिया में बढ़ रहे धन के असमान बंटवारे पर रिवॉर्ड वर्क, नॉट वेल्थ नामक रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक बीते साल देश में कुल जितना धन सर्जित हुआ, उसमें से 73 फीसद देश के सबसे अमीर एक फीसद लोगों के हिस्से में आया। वैश्विक स्तर पर स्थिति अधिक गंभीर है। कुल सर्जित धन में से 82 फीसद धन दुनिया की एक फीसद सबसे अमीर आबादी के खजाने में गया। 10 देशों के 70 हजार लोगों पर सर्वे करके जारी की गई यह रिपोर्ट अमीर-गरीब के बीच गहरी होती खाई पर चिंताजनक तस्वीर बयां करती है।

संपत्ति में उछाल

पिछले साल जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि देश के एक फीसद सबसे अमीर लोगों के पास देश की 58 फीसद दौलत है। एक वर्ष में यह संपत्ति विस्फोटक रूप से बढ़ी है। 2017 में देश में जितना धन सर्जित हुआ, उसमें से 73 फीसद देश के सबसे अमीर एक फीसद लोगों के हिस्से में आया। इसके चलते बीते साल इस अमीर आबादी की दौलत में 4.89 लाख करोड़ की वृद्धि हुई जो सभी राज्यों के शिक्षा व स्वास्थ्य बजट की 85 फीसद राशि के बराबर है। अरबपतियों की कुल दौलत 20.9 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह आंकड़ा 2017-18 के केंद्रीय बजट के बराबर है।

ऑक्सफैम इंडिया की सीईओ की राय

अरबपतियों की बढ़ती संख्या अच्छी अर्थव्यवस्था का नहीं, खराब होती अर्थव्यवस्था का संकेत है। जो लोग कठिन परिश्रम करके देश के लिए भोजन उगा रहे हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहे हैं, फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं, उन्हें अपने बच्चे की फीस भरने, दवा खरीदने और दो वक्त का खाना जुटाने में संघर्ष करना पड़ रहा है। अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई लोकतंत्र को खोखला कर रही है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।

गहराता गरीबी का साया

देश की सबसे गरीब आबादी यानी 67 करोड़ भारतीयों की संपत्ति में बीते साल महज एक फीसद बढ़ोतरी हुई, जबकि दुनिया के सबसे गरीब 3.7 लोगों की संपत्ति में कोई इजाफा नहीं हुआ।

बढ़े अरबपति

2017 में दुनियाभर में अरबपतियों की संख्या पहले के मुकाबले अप्रत्याशित तेजी से बढ़ी है। हर दो दिन में एक व्यक्ति अरबपति बना है। 2010 के बाद से अरबपतियों की संपत्ति में सालाना 13 फीसद की दर से इजाफा हुआ है। यह सामान्य कर्मियों की तनख्वाह वृद्धि से छह गुना अधिक है। कर्मियों की तनख्वाह में सालाना मात्र दो फीसद इजाफा हुआ है।

खाई पाटना है मुश्किल

अमेरिका में एक सीईओ महज एक दिन में उतना कमा लेता है जितना सामान्य कर्मी सालभर में कमाता है। भारत में किसी बड़ी गार्मेंट कंपनी में सर्वाधिक तनख्वाह पाने वाले प्रबंधक की सालाना आय के बराबर कमाई करने में ग्रामीण क्षेत्र के गरीब मजदूर को 941 वर्ष लगेंगे। इसके उलट, न्यूनतम आय पर काम करने वाले मजदूर की जीवनभर की कमाई के बराबर वह प्रबंधक महज 17.5 दिन में कमा लेगा।

महिलाओं को कम अवसर

हर दस में से नौ अरबपति पुरुष हैं। भारत में सिर्फ चार महिला अरबपति हैं, जिसमें से तीन को यह संपत्ति विरासत में मिली है। सर्वे के मुताबिक महिला कर्मियों को तरक्की के कम अवसर प्रदान किए जाते हैं।

पांच दिन तक चलने वाली इस 48वीं बैठक में व्यापार, राजनीति, कला, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से कई नामी हस्तियां शिरकत करेंगी। भारत की ओर से पीएम मोदी समेत 130 लोग इसमें शामिल होंगे। इस साल का थीम 'क्रिएटिंग ए शेयरड फ्यूचर इन ए फ्रैक्चर्ड वर्ल्ड' है। इसमें बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, ऑस्ट्रेलियाई अभिनेत्री केट ब्लेन्चेट और संगीतकार एल्टन जॉन का सम्मान किया जाएगा। इस बार फोरम में भारतीय व्यंजन और योग का नजारा देखने को मिलेगा। दावोस में 20 भारतीय कंपनियां भी शिरकत करेंगीं।

यह भी पढ़ें: दावोस में भी दिखेगा भारत का दबदबा, खास है पीएम मोदी का स्विट्जरलैंड दौरा

Posted By: Abhishek Pratap Singh