नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। राजनीतिक संकट से जुझ रहे देश वेनेजुएला ने भारत को आर्थिक मजबूती के लिए एक नई राह दिखाई है। इसके जरिए भारत अंतरराष्ट्रीय पेमेंट में अमेरिकी वित्तीय तंत्र की निर्भरता को खत्म कर सकता है। इसके लिए भारत नए विकल्प तलाश रहा है। भारत को ये फैसला अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत ऐसी कोई व्यवस्था बना लेता है तो भविष्य में अमेरिकी प्रतिबंधों और मनमानी का उस पर असर नहीं पड़ेगा।

रुपये में खरीदेगा तेल
राजनीतिक संकट और अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे वेनेजुएला ने भारत को प्रस्ताव दिया है कि वह उससे रुपये में तेल खरीद सकता है। वेनेजुएला के प्रस्ताव पर भारत गंभीरता से विचार कर रहा है। दरअसल अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला की तेल से होने वाली कमाई को बंद करने और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पद से हटाने के लिए कई तरह के प्रतिबंध थोप दिए हैं। अमेरिका ने जनवरी-2019 में विपक्ष के नेता जुआन गुआइदो को वेनेजुएला के राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दे दी है। मादुरो को पद छोड़ने को मजबूर करने के लिए अमेरिका वेनेजुएला पर नए-नए प्रतिबंध थोप रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से उसे अलग-थलग कर दिया जाए।

भारत पर भी दबाव बना रहा अमेरिका
अमेरिका ने वेनेजुएला पर जो प्रतिबंध लगाए हैं, उसमें फिलहाल अमेरिकी कंपनियों को ही रखा गया है। अमेरिकी कंपनियों को आदेश जारी किया गया है कि वह वेनेजुएला से कोई कारोबार न करें। अमेरिका का ये प्रतिबंध अभी भारत समेत अन्य देशों पर लागू नहीं है। बावजूद अमेरिका भारत समेत अन्य देशों पर दबाव बना रहा है कि वह वेनेजुएला से किसी तरह का व्यापार न करें। खास तौर पर तेल का आयात रोक दें। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र से वेनेजुएला का संपर्क खत्म हो जाने पर भारतीय तेल कंपनियों को वहां से आयात रोकना होगा या पेमेंट का कोई अन्य विकल्प तलाशना होगा। यही वजह है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय पेमेंट में अमेरिकी वित्तीय तंत्र की निर्भरता को खत्म करने पर गंभीरता से विचार करना पड़ रहा है।

ईरान मॉडल जैसा हो सकता है नया विकल्प
वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान सिस्टम तलाशने के साथ ही भारत ने अपने यहां की  कंपनियों को सलाह भी जारी की है। इसमें कहा गया है कि कंपनियां, अमेरिकी नियंत्रण वाले अंतरराष्ट्रीय पेमेंट सिस्टम से बचें। ऐसे में भारत की तेल कंपनियों के पास एकमात्र विकल्प बचा है कि वह रुपये में आयात करें। मालूम हो कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी प्रतिदिन तकरीबन तीन लाख बैरल कच्चा तेल वेनेजुएला से आयात करती हैं।

वेनेजुएला द्वारा रुपये में भुगतान करने के प्रस्ताव और भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के सुझाव को देुखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने वैकल्पिक व्यवस्था बनाने को कहा है। नई व्यवस्था में पूरा पेमेंट रुपये में किया जाएगा। ये तरीका कुछ वैसा ही होगा, जैसा कि अमेरिकी प्रतिबंध झेल रहे ईरान से तेल खरीदने के लिए भारत अपना रहा है। भारत अभी ईरान से प्रतिदिन लगभग तीन लाख बैरल तेल रुपये में भुगतान कर खरीदता है।

भारतीयों को होगा फायदा
जानकारों के अनुसार वेनेजुएला से रुपये में तेल का आयात होने से भारतीयों को काफी फायदा होगा। इससे तेल की कीमतों को स्थाई करने या कम करने में काफी मदद मिलेगी। ये भी आशंका है कि तेल के बदले वेनेजुएला को रुपये में किया जाना वाला ज्यादातर भुगतान भारत में ही बिना किसी उपयोग के पड़ा रह जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन काफी ज्यादा है। दोनों देशों के बीच सालाना करीब 420 अरब रुपये का व्यापार होता है, इसमें कच्चे तेल का आयात ही प्रमुख है। इस पूरे व्यवसाय में भारत से वेनेजुएला को होने वाला एक्सपोर्ट मात्र एक प्रतिशत है। वेनेजुएला भारत से दवाएं, खाने-पीने की चीजें और कपड़े आदि खरीदता है, लेकिन वित्तीय संकट की वजह से ये व्यापार लगभग पूरी तरह से ठप है।

मजबूत होगी रुपये की स्थिति
'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिशी' की सलाहकार व वित्त विशेषज्ञ राधिका पांडेय के अनुसार नए विकल्प के तौर पर अंतरराष्ट्रीय मार्केट में रुपये में व्यापार करने से, रुपये की स्थिति मजबूत होगी। भारत के लिए सकारात्मक शुरूआत हो सकती है। हालांकि ये इस पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुपये की डिमांड है या नहीं। अगर ऐसा होता है तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा में भी रुपये की हैसीयत बढ़ेगी। अभी रुपये का इंटरनेशनल मार्केट में शेयर बहुत कम है। भारत अभी मसाला बॉड (Masala Bond) और तेल के व्यापार में ही रुपये का इस्तेमाल करता है। अभी ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय व्यापार डॉलर और चाइनीज करेंसी यूआन में होता है। रुपये में व्यापार होने का एक बड़ा फायदा ये भी होगा कि हमें एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे कीमतें स्थायी रखने में मदद मिलेगी।

"मसाला बॉन्ड" क्या होता है?
भारतीय कंपनियों (प्राइवेट और सरकारी दोनों) को विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए कई तरह के साधनों की अनुमति भारत सरकार और रिजर्व बैंक से मिली हुई है, उन्हीं साधनों में से एक है मसाला बॉन्ड। कंपनियां विदेशों में मसाला बॉन्ड बेचकर अपनी जरूरत की पूंजी जुटाती हैं। मतलब, विदेशी पूंजी बाजार में निवेश के लिए भारतीय रुपये में जारी किए जाने वाले बॉन्ड को मसाला बॉन्ड कहते हैं। यह एक कॉर्पोरेट बांड होता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी किया जाता है। मसाला बॉन्ड को भारतीय मसालों के नाम पर मसाला बॉन्ड कहा जाता है। इनकी न्यूनतम परिपक्वता अवधि तीन साल है। अप्रैल 2016 तक यह अवधि 5 साल की थी। इसको तीन साल से पहले भुनाया नहीं जा सकता है।

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Posted By: Amit Singh

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