जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। बदलते वैश्विक माहौल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर भारत की कोशिशों का कुछ असर दिखाई देने लगा है। पिछले 24 घंटे में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूएन की महासभा को संबोधित करते हुए पहली बार भारत को स्थायी सदस्यता देने का समर्थन किया है और इसी बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की ने भी यूएन के मौजूदा स्वरूप में बड़े बदलाव की अपील की है।

जी-4 समूह के विदेश मंत्रियों की तरफ से जारी होगी अपील

बुधवार को ही भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों की बैठक में संयुक्त राष्ट्र में बदलाव का मुद्दा काफी अहम रहा है। इसी तरह से गुरुवार को देर रात भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील के समूह (जी-4) के विदेश मंत्रियों की तरफ से भी इस बारे में अपील जारी होने वाली है। जी-4 के चारों देश सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य बनने के दावेदार हैं।

भारत सभी बैठकों में उठाएगा यूएनएससी में सुधार करने की बात

सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के यात्रा पर गये विदेश मंत्री जयशंकर के एजेंडे का एक बड़ा मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में बदलाव है। दस दिनों की यात्रा के दौरान जयशंकर की 50 से ज्यादा द्विपक्षीय व बहुपक्षीय बैठकें होंगी। इसमें क्वाड संगठन के विदेश मंत्रियों से लेकर ब्रिक्स, आइ2यू2 जैसे चार देशों के संगठनों की बैठक भी है और दक्षिणी अमेरिकी व कैरिबियाई देशों के साथ भी बैठक है। इन सभी बैठकों में प्रत्यक्ष तौर पर या परोक्ष तौर पर यूएनएससी में सुधार करने की बात भारत की तरफ से उठाई जाएगी। संयुक्त राष्ट्र की महासभा को इस बार विदेश मंत्री जयशंकर ही भारत की तरफ से संबोधित करने वाले हैं, जिनमें वो इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे।

कोलंबिया विश्वविद्यालय में जयशंकर ने दिया जोर

बुधवार को कोलंबिया विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए जयशंकर ने कहा कि, पहले के मुकाबले यूएनएससी में स्थाई सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का अब ज्यादा समर्थन मिलने लगा है। पूरी दुनिया में मोटे तौर पर यह सहमति है कि सुरक्षा परिषद में बदलाव होनी चाहिए। यह समर्थन हर साल बढ़ता ही जा रहा है। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनोमी है और जल्द ही सबसे बड़ी आबादी वाला देश होगा। ऐसे देश को परिषद से बाहर रखना दुनिया के हित में नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा उठाया

संयुक्त राष्ट्र महासभा में राष्ट्रपति बाइडन की तरफ से यूएनएससी में सुधार और भारत जैसे देश को स्थाई सदस्य बनाने का अहम बयान देने के बारे में अमेरिकी सरकार की तरफ से बताया गया है कि 'अमेरिका ऐतिहासिक तौर पर इस बात का समर्थन करता है कि भारत, जर्मनी व जापान जैसे देशों को यूएनएससी का स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए।''

भारतीय पीएम और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच होने वाली द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के बाद जारी होने वाले बयानों में भी इसका जिक्र होता रहा है कि अमेरिका यूएनएससी में भारत को स्थाई सदस्य बनाने के लिए कोशिश करेगा। असलियत में पूर्व में यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्यों में से चार (अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस) की तरफ से भारत की दावेदारी का समर्थन सार्वजनिक तौर पर किया गया है। पांचवे सदस्य चीन का आधिकारिक तौर पर यह बयान रहा है कि इस बारे में व्यापक तौर पर विमर्श की जरूरत है।

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Edited By: Arun kumar Singh