बीजिंग, प्रेट्र। भारत और चीन ने दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए रचनात्मक, व्यावहारिक और दूरदर्शी सोच विकसित की है। दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखते हुए विवादों के जल्द समाधान की नीति तैयार की है। इसके लिए वार्ता प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। सीमा विवाद पर 21 वें दौर की वार्ता की समाप्ति पर यह बात चीन के विदेश मंत्रालय ने कही है।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और चीन के विदेश मंत्री वांग ई के नेतृत्व में हुई द्विपक्षीय वार्ता पर जारी बयानों में प्रक्रिया को गतिशील बनाने पर बल दिया गया है। इससे विवाद के जल्द समाधान की संभावना पैदा होगी। सिचुआन प्रांत के डुजीनग्यान शहर में दो दिवसीय वार्ता बीते सप्ताह हुई थी। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष विवाद का साफ-सुथरा, उचित और स्वीकार्य समाधान निकालने के लिए प्रयासों को बढ़ाने पर राजी हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के जारी बयान में वार्ता प्रक्रिया को तेज करने की बात कही गई है जिससे विवाद का समाधान जल्द हो सके।

वार्ता के निष्कर्ष पर चर्चा में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने बताया कि सीमा विवाद में समाधान की ओर बढ़ने के लिए दोनों पक्षों से कुछ ठोस सुझाव आए हैं। अब उनका परीक्षण किया जाएगा। दोनों पक्ष सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखते हुए विवाद सुलझाने के प्रयास बढ़ाने पर सहमत हैं। दोनों पक्ष सीमा से जुड़े मामलों पर सहयोग और सुझाव के लिए कार्यबल बनाने पर भी सहमत हो गए हैं। यह कार्यबल दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बनाने समेत विवाद के बिंदुओं को शुरुआती स्तर पर निपटाने के लिए सुझाव देगा। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच की 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई स्थानों पर विवाद है। चीन का दावा है कि भारतीय प्रांत अरुणाचल प्रदेश उसका हिस्सा है।

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Posted By: Arun Kumar Singh