जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पाकिस्तान की अवाम ने आतंकियों और कट्टरपंथियों को सिरे से नकार दिया है। लश्करे तैयबा के सरगना और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेटे और दामाद को हार का सामना करना पड़ा है। सईद ने नई पार्टी बनाकर कुल 265 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन कोई भी अपनी उपस्थित दर्ज नहीं करा सका।

यही हाल कट्टरपंथी खादिम रिजवी की पार्टी तहरीक लिब्बायक पाकिस्तान का भी हुआ।पाकिस्तान में हाफिज सईद की राजनीतिक पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने को लेकर पूरी दुनिया में चिंता जताई जा रही थी। आतंकी संगठन को मुख्य राजनीतिक धारा में लाने के खिलाफ पाकिस्तान के भीतर आवाज उठ रही थी। यहां तक कि पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग को राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया था।

लेकिन बाद में सईद अल्लाह ओ अकबर नाम की पार्टी बनाकर उम्मीदवार खड़े करने में सफल रहा। लेकिन पाकिस्तान की जनता ने हाफिज सईद को कोई तवज्जो नहीं दी। हालत यह हो गई कि गृहराज्य पंजाब से वह अपने बेटे हाफिज तल्हा और दामाद खालिद वलीद को जिताने में भी विफल रहा। हाफिज सईद कश्मीर में पाकिस्तान के छद्म युद्ध का बड़ा चेहरा था और आइएसआइ उसके आतंकी संगठन लश्करे तैयबा का इस्तेमाल भारत में बड़े आतंकी हमलों के लिए करती रही है।

माना जा रहा था कि हाफिज सईद पर कार्रवाई के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए पाकिस्तानी सेना उसे चुनाव के जरिये मुख्य धारा में लाने की साजिश कर रही है। लेकिन आम जनता ने पाकिस्तानी सेना के मंसूबे पर पानी फेर दिया। हार से निराश सईद इसके लिए पाक गृहमंत्रालय, चुनाव आयोग और दुश्मनों को जिम्मेदार ठहरा रहा है।

Posted By: Ramesh Mishra

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