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सुरेंद्र प्रताप सिंह, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय संस्था कृषि व खाद्य संगठन (एफएओ) का शीर्ष पद पाने की भारत की दावेदारी का बहुत कुछ दारोमदार अमेरिकी रुख पर निर्भर करेगा। इसके लिए भारत ने पहले ही अपनी दावेदारी का फैसला कर लिया है। कृषि उत्पादों के कारोबार को लेकर अमेरिका व चीन के बीच बढ़ी कड़वाहट का फायदा भारत उठा सकता है, लेकिन अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारत ने अपना बाजार खोलने से पहले ही मना कर दिया है, जिससे अमेरिकी समर्थन प्राप्त करने में मुश्किलें पेश आ सकती हैं।

एशिया या यूरोप में से होगा चुनाव
एफएओ के महानिदेशक का पद इस बार यूरोपीय संगठन और एशिया के किसी देश को मिल सकता है। रोटेशन पद्धति से होने वाले इस चुनाव में एशिया से भारत और चीन, जबकि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन ने दावेदारी का मन बनाया है। भारत ने इस पद के लिए नीति आयोग और वित्त आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद को नामित किया है।

चीन के लिए मुश्किल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोलबंदी के लिए विदेश मंत्रालय के साथ डॉ. चंद ने सदस्य देशों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अपनी दावेदारी का सदस्य देशों से समर्थन करने का आग्रह किया। दरअसल, इस चुनाव में अमेरिका और चीन के बीच कृषि उत्पादों को लेकर पैदा हुआ विवाद गुल खिला सकता है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका कभी भी इस अंतरराष्ट्रीय संगठन में चीन की दावेदारी का समर्थन नहीं करना चाहेगा।

इन दोनों देशों के बीच पैदा हुई कारोबारी लड़ाई का फायदा भारत उठाना चाहेगा। लेकिन भारत ने भी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपना बाजार खोलने से मना कर दिया है। ऐसे में भारत को लेकर अमेरिकी रुख कुछ भी हो सकता है। अमेरिका समेत अन्य देशों से समर्थन प्राप्त करने को लेकर भारत ने राजनयिक प्रयास तेज कर दिए हैं।

23 को होना है चुनाव
एफएओ लगभग 150 गरीब देशों में खाद्य प्रोग्राम के तहत मदद मुहैया कराता है। वर्तमान में 194 देश इस महत्वपूर्ण संगठन के सदस्य हैं। फिलहाल एफएओ के महानिदेशक ब्राजील के कृषि वैज्ञानिक जॉश ग्राजियानो हैं। उनका कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो रहा है। उससे पहले 23 जून को नए महानिदेशक का चुनाव होना है।

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Posted By: Tanisk

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