नई दिल्ली (जयप्रकाश रंजन)। कश्मीर से धारा 370 हटाने के भारत के फैसले पर चुप्पी साधने के बाद अमेरिका ने एक बार फिर एक ऐसा बयान दिया है जो एशिया में बदलते महत्वपूर्ण कूटनीतिक व रणनीतिक समीकरण की तरफ इशारा कर रहे हैं। इस बार अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भारत की संप्रभूता का जोरदार समर्थन करते हुए पड़ोसी देश चीन की तरफ इशारा किया है।

राजदूत केन जस्टर अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से यह संकेत तब आया है जब भारत में उसके राजदूत केन जस्टर अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर गये हैं। जस्टर अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में आयोजित एक फेस्टिवल में ना सिर्फ बतौर प्रमुख अतिथि शामिल हुए हैं बल्कि उन्होंने अमेरिकी सरकार की तरफ से अरुणाचल प्रदेश के विकास में योगदान देने की घोषणा भी की है।

चीन हमेशा रहा है संवेदनशील 

तवांग को लेकर चीन हमेशा से सबसे ज्यादा संवेदनशील रहा है। विदेशी राजनयिकों को छोड़ दिया जाए तो वह भारत के आला अधिकारियों के वहां जाने को लेकर भी पहले आपत्ति जताता रहा है। तवांग पर चीन आधिकारिक तौर पर दावा करता रहा है और दो वर्ष पहले तवांग का चीनी भाषा में नाम भी अलग रख चुका है। ऐसे में अमेरिकी राजदूत केन जेस्टर की अरुणाचल प्रदेश यात्रा के अपने मायने निकाले जा रहे हैं। जेस्टर ने सोशल मीडिया साइट ट्विटर के अपने हैंडल से तवांग फेस्टिवल में मनाये गये उत्सव को लेकर कई फोटो ट्विट किये हैं।

ट्विटर हैंडल से अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट की जानकारी

बुधवार देर शाम अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से केन जेस्टर के फोटो व सूचना को रिट्वीट किया और इस पर लिखा कि, ''अमेरिकी राजदूत की तवांग यात्रा इस बात को रेखांकित करता है अमेरिका भारत की अखंडता का पूरी तरह से सहयोग करता है और स्थानीय साझेदारी को लेकर प्रतिबद्ध है। अमेरिका अरुणाचल में स्वास्थ्य और समाजिक विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग कर रहा है।'' यह भी उल्लेखनीय है कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय का यह आधिकारिक बयान अमेरिकी पैसिफिक फ्लीट कमांडर के एडमिरल जॉन सी एक्वीलिनो ने नई दिल्ली में हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे पर बेहद तल्ख टिप्पणी की थी।

कई देशाेें के लिए चुनौती
एडमिरल एक्वीलिनो ने यहां तक कहा था कि जिस तरह से चीन समूचे हिंद महासागर में हथियारों की तैनाती कर रहा है उससे कई देशों के लिए चुनौती पैदा कर दिया है। उन्होंने चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना को भी उसकी आर्थिक नहीं बल्कि सैन्य ताकत के प्रसार के तौर पर चिन्हित किया है। उन्होंने यह भी कहा था कि चीन की तरफ से बढ़ता खतरा भारत व अमेरिका के बीच नौ सैनिक सहयोग की गति को तेज करेगा।

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Posted By: Prateek Kumar

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