स्वागत हैं आपका जागरण के स्पेशल पॉडकास्ट में। "श्री कृष्णा की अनदेखी दुनिआ" में "कंस किला" और "कुसुम सरोवर" की सैर होगी। मथुरा में कृष्ण मंदिर के अलावा "कंस किला" और "कुसुम सरोवर" घूमने की काफी अच्छी जगह हैं। 

"कुसुम सरोवर" 

 मथुरा जिले में "कुसुम सरोवर" स्थिति है। "कुसुम सरोवर" वही स्थान है जहां भगवान कृष्ण राधा से मिला करते थे। एक पवित्र स्थान होने के बावजूद "कुसुम सरोवर"  से एक चौका देने वाला तथ्य इसे रहस्यमी तालाब बनाने का काम करता है। यहां के लोगों का मानना है कि इस तालाब में पारस पत्थर और एक इच्छाधारी नाग की मणि है। इस सरोवर के चारों तरफ सैंकड़ों सीढ़ियां हैं। 

"कंस किला" 

फोर्ट के बारे में अधिक जानकारी नहीं होने के के कारण टूरिस्ट यहाँ आना भूल ही जाते हैं।  कंस किला यमुना नदी के तट पर बसा है। किला बड़े क्षेत्र में बना है और इसके दीवार काफी लम्बे। कहते हैं कि यमुना के उत्तरी तट स्थित कंस किला ही कंस का महल हुआ करता था। सुरक्षा के लिहाज से कई रास्ते इस तरह से बनाए गए जो भूमिगत होकर यमुना में निकल जाते हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं रास्तों का प्रयोग कंस और कंस के परिवार वाले यमुना तक पहुंचने में किया करते होंगे। कंस किला पर्यटकों के घूमने के लिए सुबह 7.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक खुला रहता है।

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Shri Krishna ep 1 : "कुसुम सरोवर" जहां मिला करते थे राधा कृष्ण

Shri Krishna ep 1 : "कुसुम सरोवर" जहां मिला करते थे राधा कृष्ण

Shri Krishna ep 1 : "कुसुम सरोवर" जहां मिला करते थे राधा कृष्ण 

 

स्वागत हैं आपका जागरण के स्पेशल पॉडकास्ट में। "श्री कृष्णा की अनदेखी दुनिआ" में "कंस किला" और "कुसुम सरोवर" की सैर होगी। मथुरा में कृष्ण मंदिर के अलावा "कंस किला" और "कुसुम सरोवर" घूमने की काफी अच्छी जगह हैं। 

"कुसुम सरोवर" 

 मथुरा जिले में "कुसुम सरोवर" स्थिति है। "कुसुम सरोवर" वही स्थान है जहां भगवान कृष्ण राधा से मिला करते थे। एक पवित्र स्थान होने के बावजूद "कुसुम सरोवर"  से एक चौका देने वाला तथ्य इसे रहस्यमी तालाब बनाने का काम करता है। यहां के लोगों का मानना है कि इस तालाब में पारस पत्थर और एक इच्छाधारी नाग की मणि है। इस सरोवर के चारों तरफ सैंकड़ों सीढ़ियां हैं। 

"कंस किला" 

फोर्ट के बारे में अधिक जानकारी नहीं होने के के कारण टूरिस्ट यहाँ आना भूल ही जाते हैं।  कंस किला यमुना नदी के तट पर बसा है। किला बड़े क्षेत्र में बना है और इसके दीवार काफी लम्बे। कहते हैं कि यमुना के उत्तरी तट स्थित कंस किला ही कंस का महल हुआ करता था। सुरक्षा के लिहाज से कई रास्ते इस तरह से बनाए गए जो भूमिगत होकर यमुना में निकल जाते हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं रास्तों का प्रयोग कंस और कंस के परिवार वाले यमुना तक पहुंचने में किया करते होंगे। कंस किला पर्यटकों के घूमने के लिए सुबह 7.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक खुला रहता है।

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