मुंबई। आस्ट्रेलिया में भारतीय टीम के लचर प्रदर्शन के लिए इंडियन प्रीमियर लीग पर दोष मढ़ने से कई क्रिकेटर इत्तेफाक नहीं रखते जबकि कुछ का मानना है कि आईपीएल और ट्वंटी-20 का चलन ही इसका जिम्मेदार है। कुछ कह रहे है कि टीम इंडिया अपनी और अपने बोर्ड की नासमझी से हारी है ना कि आईपीएल की वजह से। वहीं कुछ ऐसा नहीं सोचते।

पूर्व टेस्ट कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने कहा है कि इस बुरी हार का कारण बीसीसीआई में उचित योजनाओं का अभाव है ना कि आईपीएल का। दो अन्य पूर्व क्रिकेटरों चंदू बोर्डे और बापू नाडकर्णी ने भी भारत के खराब प्रदर्शन के कारण आईपीएल को दोषी नहीं ठहराया। भारत चार मैच की सीरीज में तीन मैच गंवा चुका है। इनमें से दो मैच उसने पारी के अंतर से गंवाए। राष्ट्रीय चयनसमिति के पूर्व अध्यक्ष वेंगसरकर ने कहा, केवल आईपीएल के कारण ही प्रदर्शन पर असर नहीं पड़ रहा है। इस दौरे का कार्यक्रम ही गलत है। सीरीज से पहले और टेस्ट मैचों के बीच पर्याप्त अभ्यास मैच नहीं रखे गए हैं। टीम के रिजर्व खिलाड़ी रोहित शर्मा और विकेटकीपर रिद्धिमान साहा पिछले महीने से नहीं खेल पाए हैं। लगातार चार टेस्ट मैच खेलने का कोई तुक नहीं है। खिलाड़ी पर्याप्त अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं। टीम में शामिल प्रत्येक खिलाड़ी को खेलने का मौका मिलना चाहिए। उन लोगों को व्यवस्था में शामिल करना जरूरी है जो खेल को जानते हैं और उच्चस्तर पर खेल चुके हैं। उन लोगों को इसमें नहीं रखा जाना चाहिए जिन्होंने अपनी जिंदगी में कभी बल्ला तक नहीं पकड़ा। जूनियर क्रिकेट, घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट और ए टीमों के दौरों का कार्यक्रम भी सही तरह से तैयार किया जाना चाहिए।

उधर चंदू बोर्डे के मुताबिक भारतीय खिलाड़ी इंग्लैंड दौरे के दौरान की गई गलतियों से सबक लेने में नाकाम रहे। बोर्डे ने कहा, आईपीएल पर दोष नहीं मढ़ा जा सकता। खिलाडि़यों ने इंग्लैंड की गलतियों से सबक नहीं लिया। वे उसी तरह से आउट हो रहे हैं। केवल सचिन तेंदुलकर ने उस तरह की गलती नहीं दोहराई। वह महान खिलाड़ी है जो वर्षों से खेल रहे हैं। वे उसी तरह की गलतियां कैसे कर रहे हैं इससे मैं हैरान हूं। उदाहरण के लिए विजय हजारे हमेशा कोशिश करते थे कि वह कोई गलती नहीं दोहराएं। बोर्डे ने राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के संन्यास ले लेने पर कहा कि वे अब भी बल्लेबाजी में योगदान दे रहे हैं लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि क्या वे क्षेत्ररक्षण में भी सही हैं। बोर्डे ने कहा, जब आपकी उम्र बढ़ती है तो आपके रिफलेक्शन कमजोर पड़ जाते हैं। इंग्लैंड में मूवमेंट था लेकिन आस्ट्रेलिया में उछाल भी है। बल्लेबाजी में उनके रिफलेक्शन थोड़ा कमजोर हैैं लेकिन क्षेत्ररक्षण का क्या होगा। यदि वे 50 रन बनाते हैं लेकिन क्षेत्ररक्षण में दस या 20 रन दे देते हैं तो फिर उनका कुल योगदान कम हो जाएगा। भारत की तरफ से 41 टेस्ट मैच खेलने वाले नाडकर्णी ने भिन्न परिस्थितियों को अपनाने में खिलाडि़यों की अक्षमता पर हैरानी जताई। नाडकर्णी ने कहा, यदि आईपीएल ही इसके लिए जिम्मेदार होता तो इसका अन्य खिलाडि़यों पर भी प्रभाव पड़ना चाहिए था। असली कारण परिस्थितियों से सामंजस्य नहीं बिठा पाना है। वे टेस्ट क्रिकेटर हैं। उन्हें तालमेल बिठाने में माहिर होना चाहिए। यदि उन्हें लगता है कि आईपीएल उनका खेल प्रभावित कर रहा है तो उन्हें इसमें नहीं खेलना चाहिए।

उधर पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी इससे इत्तेफाक नहीं रखते, उनका मानना है कि भारत के खराब प्रदर्शन का प्रमुख कारण आईपीएल ही है। बेदी ने कहा, यदि व्यापकता में देखा जाए तो आप यह समझ सकते हो कि जब क्रिकेट से वास्ता नहीं रखने वाले लोग यह खेल चलाएंगे तो क्या होगा। आप पेशेवर संस्था चलाना चाहते हो और साथ ही आपने मानद पद भी रखे हुए हैं। क्रिकेट के खेल में हमेशा कोई शास्त्र होता है लेकिन आईपीएल का कोई शास्त्र नहीं है। यह केवल मारो और दौड़ो का खेल है। क्रिकेट व्यावसायिक खेल है लेकिन जहां तक पैसे का सवाल है तो बीसीसीआई को अपनी सीमा समझनी चाहिए। बीसीसीआई की तकनीकी समिति बहुत महत्वपूर्ण समिति है जिसे सारे महत्वपूर्ण फैसले करने चाहिए। सुनील गावस्कर लंबे समय तक इसके प्रमुख रहे और अब सौरव गांगुली हैं। मुझे बताओ कि इस समिति का खेल के विकास में क्या योगदान है। उन्होंने अब तक कुछ नहीं किया है। पूर्व तेज गेंदबाज मनोज प्रभाकर ने कहा कि युवा खिलाड़ी आजकल किसी भी तरह से आईपीएल का हिस्सा बनना चाहते हैं। प्रभाकर ने कहा, क्या आपने कभी किसी युवा को यह कहते हुए सुना कि मैं रणजी ट्राफी में खेलना चाहता हूं। वे केवल इतना कहते हैं कि भाई कुछ भी करके आईपीएल में खिलवा दो हमें। जब आप डेढ़ महीने खेलकर करोड़ों कमा सकते हो तो फिर कोई भी कड़ी मेहनत नहीं करना चाहता।

कुल मिलाकर यहां यह साफ है कि आईपीएल पर कोल्ड वार एक बार फिर शुरू हो चुका है। कारण फिर से टीम इंडिया का लचर प्रदर्शन है बस फर्क इतना है कि इस बार दुख और निराशा थोड़ी ज्यादा है क्योंकि पहले सिर्फ टीम इंडिया हारती थी, इस बार एक चैंपियन टीम बुरी तरह हारी है।

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