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Tokyo Olympics Photos: रवि दहिया ने फाइनल में पहुंचकर पदक किया पक्का, अब इतिहास रचने पर होगी नजर

5 photos    |  Published Thu, 05 Aug 2021 12:19 PM (IST)
1/ 5रवि दहिया ने फाइनल में पहुंचकर पदक किया पक्का
रवि दहिया ने फाइनल में पहुंचकर पदक किया पक्का

टोक्यो ओलिंपिक में बुधवार को भारत के पहलवान रवि दहिया ने फाइनल में पहुंचकर कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया। हरियाणा के रवि अब स्वर्ण के लिए गुरुवार को मौजूदा विश्व चैंपियन रूस के जावुर युगुएव से भिड़ेंगे जिनसे वह 2019 विश्व चैंपियनशिप सेमीफाइनल में हार गए थे।

2/ 5पिन फाल ने दिलाई जीत
पिन फाल ने दिलाई जीत

सेमीफाइनल में दहिया के पास पहले दौर के बाद 2-1 की बढ़त थी, लेकिन सानायेव ने उनके बायें पैर पर हमला बोलकर तीन बार उन्हें पलटने पर मजबूर करते हुए छह अंक ले लिए। फिर एक समय दहिया 2-9 से पीछे हो गए और ऐसा लग रहा था कि दहिया हार की तरफ बढ़ रहे हैं, लेकिन भारतीय पहलवान ने संयम नहीं खोते हुए वापसी की और एक मिनट में बाजी पलट दी। उन्होंने विरोधी पहलवान के दोनों पैरों पर हमला किया और उसे कसकर पकड़ लिया। इसके बाद उसे जमीन पर पटखनी देकर पिन फाल से मुकाबला जीत लिया।

3/ 5क्या होता है पिन फाल?
क्या होता है पिन फाल?

अगर कोई पहलवान विरोधी के दोनों कंधे जमीन पर लगा दे तो मैच वहीं खत्म हो जाता है और वो जीत जाता है। दहिया ने इससे पहले दोनों मुकाबले तकनीकी दक्षता के के आधार पर जीते थे। उन्होंने पहले दौर में कोलंबिया के टिगरेरोस उरबानो आस्कर एडवर्डो को 13-2 से हराने के बाद बुल्गारिया के जार्जी वेलेंटिनोव वेंगेलोव को 14-4 से हराया।

4/ 5रवि के पास इतिहास रचने का मौका
रवि के पास इतिहास रचने का मौका

रवि ओलिंपिक फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय पहलवान हैं। उनसे पहले सुशील कुमार 2012 लंदन ओलिंपिक के फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा था। अब रवि के पास कुश्ती में भारत को पहला स्वर्ण जिताकर इतिहास रचने का मौका है।

5/ 5मेरा काम अभी पूरा नहीं हुआ: रवि
मेरा काम अभी पूरा नहीं हुआ: रवि

सेमीफाइनल में जीत के बाद रवि ने कहा, 'मुझे सानायेव को उतनी बढ़त लेने का मौका ही नहीं देना चाहिए था। मैं इससे खुश नहीं हूं। मैं उसे दो बार पहले भी हरा चुका हूं तो मुझे पता था कि पिछड़ने के बावजूद वापसी कर सकता हूं। यह करीबी मुकाबला था और मुझे बढ़त गंवानी नहीं चाहिए थी। मेरा काम अभी पूरा नहीं हुआ है। मैं यहां एक लक्ष्य लेकर आया हूं और वह अभी अधूरा है।'

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