अपने पसंदीदा टॉपिक्स चुनें close

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

संजय पोखरियाल   |  Publish Date:Mon, 23 Oct 2017 04:29 PM (IST)
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

भारत में सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छठ। मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। छठ पर्व के संबंध में पौराणिक मान्यता के अनुसार यह प्राय: महिलाओं द्वारा किया जाता है किंतु कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाली महिला को परवैतिन भी कहा जाता है। चार दिनों के इस व्रत में व्रती को लगातार उपवास करना होता है। भैयादूज के तीसरे दिन से यह आरम्भ होता है। पहले दिन सेन्धा नमक, घी से बना हुआ अरवा चावल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ली जाती है। अगले दिन से उपवास आरम्भ होता है। व्रति दिनभर अन्न-जल त्याग कर शाम करीब 7 बजे से खीर बनाकर, पूजा करने के उपरान्त प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिसे खरना कहते हैं। तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य यानी दूध अर्पण करते हैं। अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाते हैं। पूजा में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है; लहसून, प्याज वर्जित होता है।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

भारत की विविध संस्कृति का एक अहम अंग यहां के पर्व हैं। भारत में ऐसे कई पर्व हैं जो बेहद कठिन माने जाते हैं और इन्हीं पर्वों में से एक है छठ पर्व। छठ को सिर्फ पर्व नहीं महापर्व कहा जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती को लगभग तीन दिन का व्रत रखना होता है जिसमें से दो दिन तो निर्जली व्रत रखा जाता है। आइए आज के इस अंक में जानें छठ के बारे में कुछ विशेष बातें और छठ व्रत कथा।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

क्या है छठ

छठ पर्व और षष्ठी का अपभ्रंश है। कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के तुरंत बाद मनाए जाने वाले इस चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन है और महत्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी की होती है। इसी कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया।

तस्‍वीरों के जारिए जानिए क्यों मनाते हैं छठ महापर्व
तस्‍वीरों के जारिए जानिए क्यों मनाते हैं छठ महापर्व

छठ पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

छठ व्रत कथा

मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है और इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री और बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को इन्हीं देवी की पूजा की जाती है। शिशु के जन्म के छह दिनों के बाद भी इन्हीं देवी की पूजा करके बच्चे के स्वस्थ, सफल और दीर्घ आयु की प्रार्थना की जाती है। पुराणों में इन्हीं देवी का नाम कात्यायनी मिलता है, जिनकी नवरात्र की षष्ठी तिथि को पूजा की जाती है।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

छठ व्रत की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह परंपरा कैसे शुरू हुई, इस संदर्भ में एक कथा का उल्लेख पुराणों में मिलता है। इसके अनुसार प्रियव्रत नामक एक राजा की कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप ने उन्हे पुत्रयेष्टि यज्ञ करने का परामर्श दिया।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

यज्ञ के फलस्वरूप महारानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, किंतु वह शिशु मृत था। इस समाचार से पूरे नगर में शोक व्याप्त हो गया। तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी। आकाश से एक ज्योतिर्मय विमान धरती पर उतरा और उसमें बैठी देवी ने कहा, ‘मैं षष्ठी देवी और विश्व के समस्त बालकों की रक्षिका हूं.’ इतना कहकर देवी ने शिशु के मृत शरीर का स्पर्श किया, जिससे वह बालक जीवित हो उठा। इसके बाद से ही राजा ने अपने राज्य में यह त्योहार मनाने की घोषणा कर दी।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

दूसरी छठ व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी के सूर्यास्त और सप्तमी के सूर्योदय के मध्य वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था। प्रकृति के षष्ठ अंश से उत्पन्न षष्ठी माता बालकों की रक्षा करने वाले विष्णु भगवान द्वारा रची माया हैं। बालक के जन्म के छठे दिन छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं और जिंदगी मे किसी प्रकार का कष्ट नहीं आए। अत: इस तिथि को षष्ठी देवी का व्रत होने लगा।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

तीसरी छठ व्रत कथा

एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुआ में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत किया। इससे उसकी मनोकामनाएं पूरी हुई तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया।

तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें
तस्वीरों के जरिए जानें सूर्पासना के पवित्र पर्व ‘छठ’ से जुड़ी कुछ विशेष बातें

इसके अलावा छठ महापर्व का उल्लेख रामायण काल में भी मिलता। आज छठ ना सिर्फ बिहार और यूपी बल्कि संपूर्ण भारत में समान हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

DISCLAIMER: JPL and its affiliates shall have no liability for any views, thoughts and comments expressed on this article.

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.OK