रानी पद्मिनी के जौहर से लेकर अभेद्य दीवारों तक... राजस्थान के इन किलों में आज भी गूंजती है राजपूती शौर्य गाथा
राजस्थान के इन किलों में वहां की वीरता और शौर्य की कहानी छिपी है।
1/6राजस्थान के किले
राजस्थान के इतिहास और संस्कृति की झलक वहां के ऐतिहासिक किलों में नजर आती है। ये किले राजस्थान के अमर इतिहास, शौर्य और वैभव की कहानी को बयां करते हैं। अगर आप राजस्थान घूमने जा रहे हैं और वहां के इतिहास को करीब से समझना चाहते हैं, तो ये 5 किले आपको जरूर देखने चाहिए।
2/6चित्तौड़गढ़ का किला
चित्तौड़गढ़ का किला भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। ये किला वीरता और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि इसी किले में महारानी पद्मिनी ने जौहर किया था।
3/6कुंभलगढ़ किला
इस किले को 15वीं शताब्दी में महाराजा कुंभल ने बनवाया था। इस किले की संरचना ऐसी है कि इस पर विजय हासिल करना नामुमकिन है। इस किले की बाहरी दीवार लगभग 36 किलोमीटर लंबी है।
4/6मेहरानगढ़ का किला
जोधपुर में स्थित ये किला अपनी विशाल दीवारों और नक्काशीदार महलों के लिए मशहूर है। इस किले को 1459 में राव जोधा ने बनवाया था। इस किले में मौजूद संग्रहालय में आप राजस्थान के इतिहास की खूबसूरत झलक देख सकते हैं।
5/6आमेर का किला
जयपुर के पास अरावली की पहाड़ियों पर स्थित आमेर किला अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इस किले को राजा मान सिंह प्रथम ने बनवाया था। ये किला राजपूती वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। ये किला यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में भी शामिल है।
6/6जूनागढ़ का किला
बीकानेर में स्थित जूनागढ़ किला की नींव 1478 में राव बीका ने रखवाई थी। लाल बलुआ पत्थरों से बना ये किला बेहद खूबसूरत है और राजपूती राजाओं की वीरता की कहानी कहता है। माना जाता है कि ये किला अभेदय था और दुश्मन इस किले को कभी भेद नहीं पाए। इस किले के अंदर गज मंदिर, शीश महल, करण महल और रंग महल मौजूद हैं।