नई दिल्ली, योगेश शर्मा। कुश्ती की वैश्विक संस्था युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने मिट्टी पर होने वाली कुश्ती को जब से मान्यता दी है तभी से भारत में कुश्ती के दो संघों भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआइ) और भारतीय शैली कुश्ती महासंघ (आइएसडब्ल्यूएआइ) के बीच नया दंगल शुरू हो गया है। दोनों ही इस मिट्टी की कुश्ती पर अपना अधिकार जताने के लिए एक-दूसरे पर नए दांव-पेच के साथ आरोप लगा रहे हैं।

चैंपियनशिप पर रोक नहीं

डब्ल्यूएफआइ 29 और 30 दिसंबर को पुणे में प्रथम परंपरागत शैली कुश्ती आयोजित कर रहा है, लेकिन इस चैंपियनशिप का विरोध आइएसडब्ल्यूएआइ ने किया है। आइएसडब्ल्यूएआइ इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि डब्ल्यूएफआइ यह चैंपियनशिप करा सकता है, लेकिन वह किसी भी टाइटल का नाम नहीं दे सकता।

डब्ल्यूएफआइ को अधिकार नहीं

आइएसडब्ल्यूएआइ के अध्यक्ष रामाश्रय यादव ने दैनिक जागरण से कहा कि डब्ल्यूएफआइ को यह चैंपियनशिप कराने का कोई अधिकार नहीं है। हम इसे 1958 से 2017 तक कराते आ रहे हैं। हिंद केसरी देश का सबसे बड़ा टाइटल है। युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भारत में मिट्टी की कुश्ती चैंपियनशिप कराने की हमें ही मान्यता दी है, जबकि डब्ल्यूएफआइ को मैट की ओलंपिक की कुश्ती कराने की मान्यता दी हुई है। उनके संविधान में ही नहीं है कि वह मिट्टी की कुश्ती करा सके। हम किसी भी पहलवान से कोई पैसा नहीं लेते हैं।

आइएसडब्ल्यूएआइ हो रहा है परेशान

वहीं, इस मामले पर डब्ल्यूएफआइ के अधिकारी ने कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुसार हम बिना किसी टाइटल का नाम देकर पुणे में हो रही यह चैंपियनशिप करा सकते हैं। हम मिट्टी की कुश्ती को बढ़ावा चैंपियनशिप कराकर ही दे सकते हैं। हमने गोंडा में राष्ट्रीय चैंपियनशिप कराई और अंडर-23 चैंपियनशिप कराई, लेकिन खेल मंत्रालय से अभी कोई पैसा नहीं लिया और अपने खर्चे से चैंपियनशिप कराई।

आइएसडब्ल्यूएआइ का काम सिर्फ पैसा कमाना था और हमने उन सभी गलत चीजों पर रोक लगा दी, इसलिए वह परेशान हो रहे हैं। वे पहलवानों से पैसा लेकर चैंपियनशिप कराते हैं। हम इन सभी चीजों को रोक रहे हैं। अगली सुनवाई 27 मार्च को है और हम वहां उनकी सच्चाई को सामने ला देंगे।

हाल में ही बुडापेस्ट में डब्ल्यूएफआइ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के अध्यक्ष से मिले थे। उनसे कहा गया था कि आप भारत में मिट्टी की कुश्ती को बढ़ावा दें और वह इसी दिशा में पुणे में चैंपियनशिप करा रहे हैं और इसकी रिपोर्ट वहां भेजेंगे। आइएसडब्ल्यूएआइ को खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक महासंघ से मान्यता प्राप्त नहीं है। वह कैसे पहलवानों को बाहर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलने भेजेंगे, जबकि विदेशों में होने वाले टूर्नामेटों की एक प्रक्रिया है जिसमें वह फिट नहीं बैठते।

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Posted By: Pradeep Sehgal

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