नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। जिमनास्ट वर्ल्ड कप में भारत की तरफ से पहला मेडल जीतने वाली अरुणा बुडा रेड्डी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि फिजिकल फिटनेस टेस्ट के दौरान उनकी वीडियोग्राफी की गई। उनका आरोप है कि बिना उनकी जानकारी के भारतीय खेल प्राधिकरण के कोचों द्वारा ऐसा किया गया। उनका यह टेस्ट दिल्ली के आइजीआइ स्टेडियम में मार्च महीने के दौरान किया गया था।

जिम्नास्टिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (GFI) द्वारा उन्हें सूचित किया गया कि ऐसे किसी व्यक्ति को वीडियो रिकार्ड करने के लिए अधिकृत या आदेशित नहीं दिया गया था। इस सूचना के बाद उन्होंने कोच के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी है। अरुणा ने 2018 मेलबर्न वर्ल्ड्स में भारत की तरफ से कांस्य पदक जीता था।

यह घटना 24 मार्च 2022 की है जब अरुणा बाकू विश्व कप से पहले अपने कोच मनोज राणा के साथ जीएफआई द्वारा निर्देशित एक फिटनेस टेस्ट के लिए दिल्ली आई थी। अरुणा के अनुसार, उनके घायल घुटने पर किए गए पूरे टेस्ट को उनकी सहमति के बिना वहां मौजूद कोचों में से एक के निजी मोबाइल फोन के द्वारा फिल्माया गया। उनका यह टेस्ट 10 मिनट तक चला।

24 मई को तेलंगाना जिम्नास्ट को जीएफआई प्रेसिडेंट से एक पत्र मिला जिसके बाद वो चौंक गई। उस पत्र के माध्यम से उन्हें पता चला कि महासंघ द्वारा उनके टेस्ट की वीडियोग्राफी का आदेश नहीं दिया गया था जबकि टेस्ट के दौरान उनकी वीडियोग्राफी की गई थी।

इस पत्र में लिखा गया था कि आपके द्वारा वीडियो अनुरोध करने को लेकर यह सूचित किया जाता है कि फिटनेस टेस्ट का वीडियो रिकॉर्ड करने की आवश्यकता नहीं थी। महासंघ द्वारा कोई वीडियोग्राफी का आदेश नहीं दिया गया था और महासंघ के पास उस मूल्यांकन की ऐसी कोई वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं है।

उसके बाद अरुणा ने जीएफआई प्रसिडेंट को जवाब में लिखा कि मेरे फिटनेस टेस्ट का वीडियो लिया गया था। मेरे पास अपनी बात साबित करने के लिए सबूत है। इसलिए, मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि आप उनसे वीडियो प्राप्त करने में मेरी मदद करें।

इस पूरे घटनाक्रम पर अरुणा के कोच मनोज राणा, जो आशीष कुमार और मेघना रेड्डी जैसे देश के कुछ बेहतरीन जिमनास्ट को प्रशिक्षित करते हैं, ने कहा कि उनके पास यह साबित करने के लिए सबूत हैं कि अरुणा की फिटनेस वीडियो रिकॉर्ड की गई थी और वह इसे SAI के महानिदेशक को सौंप देंगे।

Edited By: Sameer Thakur