मेरठ, संतोष शुक्ल। 16 वर्ष का सौरभ अगर ओलंपियन चैंपियन चीनी निशानेबाज को हराकर स्वर्ण पदक जीता है तो ये सफलता कोई तुक्का नहीं थी। सौरभ शूटिंग रेंज में एक स्थान पर रोजाना चार घंटे खड़े रहने का कड़ा अभ्यास करता था। जबरदस्त एकाग्रता के दम पर सौरभ ने गत दिनों जूनियर वर्ल्ड कप में रिकार्ड बना दिया था। किसी भारतीय निशानेबाज ने पहली बार एशियाड में एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीता है। सौरभ पूर्व ओलंपियन जसपाल राणा का सबसे होनहार शिष्य माना जाता है।

जर्मनी में बनाया रिकार्ड

मेरठ की धरती हमेशा तेज तर्रार खिलाडिय़ों को पैदा करती रही है। इस कड़ी की नई सनसनी कलीना गांव का सौरभ चौधरी बन गया, जब जकार्ता में खेले जा रहे एशियाड में उसने 2016 रियो ओलंपिक चैंपियन चीनी निशानेबाज को शिकस्त दे दी। कोच अमित कुमार सौरान कहते हैं कि ओलंपियन विजेता के सामने बड़े-बड़े खिलाड़ी दबाव में आ जाते हैं, वहीं सौरभ के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ा। इससे पहले सौरभ का चयन भी भारत के ओलंपियन शूटर जीतू राय की जगह हुआ था। पिछले माह जर्मनी में खेली गई वल्र्ड कप जूनियर में जब उसने नया रिकार्ड बना दिया, तभी मान लिया गया कि यह लंबी रेस का घोड़ा साबित होगा।

रंग लाई सौरभ की मेहनत

सौरभ दिसंबर 2014 में पहली बार बिलौनी शूटिंग रेंज पहुंचा। कोच अमित बताते हैं कि अगले साल यानी 2015 में वह दिल्ली में खेली गई यूथ नेशनल के लिए सेलेक्ट हो गया। 2016 में जर्मनी में होने वाली स्पर्धा के लिए चयनित कर लिया गया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सौरभ अपने कोच एवं पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जसपाल राणा की बेटी दिव्यांशी राणा के साथ वर्ल्ड कप में मिक्स डबल्स का भी पदक जीत चुका है। इंडिया कैंप में स्थान बनाने के बाद प्रदर्शन की धार तेज होती गई।

कोच ने मोबाइल घर रखवा दिया

सौरभ के कोच अमित सौरान कहते हैं कि वह बेहद अनुशासित लड़का है। किसी चीज का कोई शौक नहीं रखा। घर वालों ने मोबाइल दिया था, किंतु कोच ने इसे भी घर पर रखने के लिए कहा। सौरभ की दिनचर्या रोजाना आठ घंटे शूटिंग रेंज के इर्द गिर्द घूमती रह गई। जूनियर इंडिया के कोच जसपाल राणा दावा कर चुके हैं कि सौरभ ओलंपिक पदक भी जीतेगा।

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Edited By: Pradeep Sehgal