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बचपन की शांत प्रवृत्ति बनी शतरंज की ताकत, प्रिशिता गुप्ता ने जीता राष्ट्रीय खिताब; जम्मू में अंडर-17 चैंपियन बनीं

Published: Thu, 08 Oct 2026 04:24 PM (IST)

15 वर्षीय प्रिशिता ने जम्मू में आयोजित 36वीं नेशनल अंडर-17 गर्ल्स चेस चैंपियनशिप 2026 जीतकर खिताब अपने नाम किया।

प्रिशिता गुप्ता

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लोकेश शर्मा, जागरण नई दिल्ली। बचपन में ज्यादा भागदौड़ के बजाय एक जगह शांत बैठकर किताबों में समय बिताने की आदत को मां ने कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने बेटी प्रिशिता गुप्ता की इसी एकाग्रता को शतरंज की बिसात पर उतार दिया। छह वर्ष की उम्र में शुरू हुआ यह सफर अब राष्ट्रीय खिताब तक पहुंच गया है।
15 वर्षीय प्रिशिता ने जम्मू में आयोजित 36वीं नेशनल अंडर-17 गर्ल्स चेस चैंपियनशिप 2026 जीतकर खिताब अपने नाम किया। अब वह अगले वर्ष विश्व, एशियन, वेस्टर्न एशियन और कामनवेल्थ अंडर-18 गर्ल्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

28 सितंबर से छह अक्टूबर तक हुई प्रतियोगिता में खिताब जीतने के बाद प्रिशिता का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीतना है। दिल्ली के प्रताप बाग स्थित सीसी कालोनी की रहने वाली प्रिशिता छह वर्ष की उम्र से शतरंज खेल रही हैं। उनकी मां रीना गुप्ता गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में प्रिशिता का स्वभाव कुछ शांत था। हालांकि, जिस काम को शुरू करती थीं, उसे पूरे मन और लगन से पूरा करने की आदत थी। इसी गुण को पहचानते हुए उन्होंने बेटी को शतरंज से जोड़ने का फैसला किया।

केजी में बच्चों की लाइब्रेरी में किताबों के बीच बैठकर समय बिताने वाली प्रिशिता धीरे-धीरे शतरंज की ओर आकर्षित हुईं। शतरंज में लंबे समय तक एकाग्र रहना, प्रतिद्वंद्वी की चाल को समझना और कई चाल आगे की रणनीति तैयार करना उनके स्वभाव के अनुकूल रहा। इसके बाद उन्होंने नियमित अभ्यास के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया।

भारत की 42वीं महिला इंटरनेशनल मास्टर

प्रिशिता वर्तमान में भारत की 42वीं महिला इंटरनेशनल मास्टर हैं। वर्ष 2026 में उन्होंने 23वीं नेशनल वूमेन टीम चेस चैंपियनशिप में टीम स्वर्ण और व्यक्तिगत रजत पदक जीता। वर्ष 2024 में नेशनल सब-जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। वर्ष 2025 में कामनवेल्थ चेस चैंपियनशिप के अंडर-16 गर्ल्स वर्ग, कामनवेल्थ ब्लिट्ज और एशियन यूथ चैंपियनशिप के अंडर-16 रैपिड गर्ल्स वर्ग में स्वर्ण पदक जीते।

प्रिशिता का कहना है कि अगले वर्ष उनका लक्ष्य विश्व और एशियाई स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीतना है। वह अपनी सफलता में प्रशिक्षक सावित्री जोशी और करुण दुग्गल के मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण मानती हैं।