यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 29, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
National Sports Day: मीट द चैंपियन पहल का आयोजन करेगा खेल मंत्रालय
कामनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज निकहत जरीन पैरालिंपिक और कामनवेल्थ गेम्स की पदक विजेता भावना ...और पढ़ें

नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। अब लिगामेंट्स के जीन की जांच कर खिलाड़ियों को भविष्य में लगने वाली चोटों की आशंका का अनुमान लगाया जा सकेगा। लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (एलएनआइपीई) में शोधकर्ता डा मनीष शुक्ला ने 200 खिलाड़ियों पर शोध से उक्त निष्कर्ष निकाला है। इसका प्रकाशन इंडियन जर्नल आफ आर्थोपेडिक और आर्थोपेडिक जर्नल आफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में भी हुआ है।
डा मनीष शुक्ला ने शोध के दौरान खिलाड़ियों की लार के नमूने में से खासतौर पर घुटने की कार्यप्रणाली के लिए जिम्मेदार इंटीरियर क्रूशिएट लिगामेंट के जीन को अलग कर उसमें परिवर्तन को देखा। 2020-21 में किया गया शोध जनवरी 2022 में पूरा हुआ। शोधा में यह सामने आया कि जिन खिलाड़ियों के उक्त जीन में मानक की तुलना में कोई परिवर्तन नहीं था, उनमें चोट लगने की आशंका कम थी। जीन परिवर्तन शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करता है, इसलिए जिन खिलाडि़यों के जीन की संरचना मानक के कुछ अलग होती है, उनकों चोट लगने की आशंका ज्यादा होती है। इस अध्यन के आधार पर ऐसे खिलाड़ियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा सकती है। डा शुक्ला का दावा है कि खेल के दौरान लगने वाली चोटों में जेनेटिक घटकों की भूमिका पर यह अनूठा शोध है।
डा. शुक्ला के अनुसार शरीर निर्माण में डीएनए में पाए जाने वाले विभिन्न जीन की भूमिका अहम होती है। यदि किसी के जीन के मानक स्तर में परिवर्तन होता है तो शारीरिक संरचना व कार्यात्मक परिवर्तन हो जाता है। ऐसे खिलाड़ी जिनके घुटने के लिगामेंट के जीन में बदलाव मिलता है, उन्हें विशेष प्रशिक्षण, देखभाल व सावधानी बरतते हुए चोटों से बचाया जा सकता है। डा शुक्ला ने यह शोध कार्य एलएनआइपीई के स्पोर्ट्स फिजियोलाजी के विभागाध्यक्ष व संस्थान के वाइस चांसलर डा विवेक पांडेय और फिजियोलाजी के विशेषज्ञ डा रवींद्र सिंह के मार्गदर्शन में पूरा किया है। शोध कार्य को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भारत सरकार के खेल मंत्रालय से मदद से मांगी है।
इस तरह हो सकता है बचाव : खिलाडि़यों के पैर में मोच आना, लिगामेंट टूटना, नसों में खिंचाव आना, पैरों में सूजन आना जैसी परेशानियां अक्सर खेलते वक्त आ जाती हैं। इनकी वजह से उनका बहुमूल्य समय तो नष्ट होता ही है, उनके प्रशिक्षण पर खर्च धन व अन्य संसाधन भी व्यर्थ चले जाते हैं। ऐसे में जांच करने पर यदि किसी खिलाड़ी में चोट लगने का जोखिम अधिक मिलता है तो उन्हें पहले ही दिशा-निर्देश दिए जा सकेंगे। खेल के दौरान आवश्यक साधन-संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। घुटने में चोट न लगे इसके लिए नी-कैप, जूतों का चयन व अतिरिक्त सुरक्षा उपायों का उपयोग पूर्व में ही किया जा सकेगा। साथ ही सतह का ध्यान रखकर फिसलने की आशंका व पैर मुड़ने के खतरे से भी बचाया जा सकेगा।
मीट द चैंपियन पहल का आयोजन करेगा खेल मंत्रालय
केंद्रीय खेल मंत्रालय सोमवार को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर देश भर के 26 स्कूलों में मीट द चैंपियन पहल का आयोजन करेगा।
कामनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज निकहत जरीन, पैरालिंपिक और कामनवेल्थ गेम्स की पदक विजेता भावना पटेल और मनप्रीत सिंह भी इस पहल का हिस्सा होंगे। मीट द चैंपियंस एक अनूठा स्कूल का दौरा करने का अभियान है, जिसे पिछले साल दिसंबर में ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने शुरू किया था और यह पिछले कुछ महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचा है। स्कूल के दौरे के दौरान इस चैंपियन एथलीट अपने जीवन के अनुभव और सही खाने के टिप्स स्कूली बच्चों के साथ साझा किए थे। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) भी इस साल राष्ट्रीय खेल दिवस को फिट इंडिया अभियान के हिस्से के रूप में पूरे देश में मनाएगा।
