मनाली, जेएनएन। यदि देखनी हो मेरी उड़ान तो आसमान से कह दो कि और ऊंचा हो जाए। ये पंक्तियां मानो कुल्लू की आंचल ठाकुर के लिए ही गढ़ी गई हैं। भारत की इस बेटी ने तुर्की में चल रही स्कीइंग चैंपियनशिप में देश को पहला पदक दिलाकर देश नाम रोशन किया। आंचल ने कांस्य पदक अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता में पदक जीतने वाली वह भारत की पहली खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एल्पाइन एज्डेर 3200 कप में जीता। एल्पाइन एज्डेर 3200 कप का आयोजन स्की अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन (एफआइएस) करता है। आंचल ने यह पदक स्लालम (सर्पिलाकार रास्ते पर स्की दौड़) रेस वर्ग में जीता है। इस बार यह टूर्नामेंट तुर्की में आयोजित हुआ था।

बेटियां किसी से कम नहीं 

बेटी की इस कामयाबी से माता रामदेई व पिता रोशन ठाकुर फूले नहीं समा रहे। ठाकुर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कई वर्षो से मेहनत की है। बेशक उनकी मेहनत को आज बेटी आंचल ने सफल कर दिया। आंचल बचपन से ही स्कीइंग में गहरी रुचि रखती है। आंचल और अन्य बच्चों को जब सफलता अर्जित करते हुए देखता हूं तो लगता है कि मेरी मेहनत अब रंग लाने लगी है। उन्होंने कहा कि आंचल के साथ-साथ उनका लड़का हिमांशु भी तुर्की में प्रशिक्षण ले रहा है। उन्होंने कहा कि तुर्की में आयोजित टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन से आंचल के शीतकालीन ओलंपिक में क्वालीफाई करने की पूरी उम्मीद है। जिस तरह से बच्चे विदेशों से कड़ी मेहनत कर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं उससे शीतकालीन खेलों में इनके द्वारा बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद भी बढ़ी है।

पीएम मोदी ने दी बधाई

देश को स्कीइंग पहला अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाने वाली आंचल को पीएम मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी। आंचल को ट्विटर के जरिए दिए एक बधाई संदेश में मोदी ने कहा, 'पूरा देश तुर्की में आयोजित एफआईएस अंतर्राष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता में आपकी ऐतिहासिक उपलब्धि से बहुत खुश है। भविष्य के लिए आपके ढेर सारी शुभकामनाएं।'

उम्मीद है अब सहयोग मिलेगा : आंचल

पीएम मोदी के ट्वीट करने के बाद आंचल ठाकुर ने कहा कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि प्रधानमंत्री मेरे लिए ट्वीट करेंगे। यह अकल्पनीय है। मैं उम्मीद करती हूं कि हमें भी दूसरे लोकप्रिय खेलों के खिलाड़ियों के समकक्ष आंका जाए। अभी तक तो सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला है। उसने कहा कि मैं इतना ही कहना चाहती हूं कि हम जूझ रहे हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं सातवीं कक्षा से ही यूरोप में स्कीइंग कर रही हूं। पापा हमेशा चाहते थे कि मैं स्कीइंग करूं और इसके लिए अपनी जेब से खर्च कर रहे थे। बिना किसी सरकारी सहायता के उन्होंने मुझ पर और मेरे भाई पर काफी खर्चा किया। हमारे लिए और भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि भारत में अधिकांश समय बर्फ नहीं गिरती है लिहाजा हमें बाहर जाकर अभ्यास करना पड़ता था।

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By Pradeep Sehgal