नई दिल्ली, विकास पांडेय। शतरंज की छोटी दुनिया में आज रमेशबाबू प्रगानंधा एक बड़ा नाम है। 14 वर्षीय प्रगानंधा चौथे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर हैं। चेन्नई में जन्में प्रगानंधा को इस खेल के सरताज विश्वनाथन आनंद का खेल पसंद है लेकिन नॉर्वे के दिग्गज शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कालर्सन का खेल उनको सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। वर्तमान और उनके भविष्य को लेकर रमेशबाबू प्रगानंधा से जागरण संवाददाता ने खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश :

-आपने शतरंज को ही क्यों करियर के रूप में चुनने का फैसला किया ?

-जब मैं बहुत छोटा था, तब मैं इसे केवल खेलने को लेकर ही खुश था। इसके बाद जब मैंने अपने शुरुआती दिनों में बहुत सारे पदक जीते तब मैं इसको लेकर गंभीर हो गया और इसे करियर के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया। आप इसे इस तरह कह सकते हैं कि मैं एक बार इसमें घुसा तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

-शतरंज में विश्वनाथन आनंद देश के कई युवा खिलाडि़यों के प्रेरणास्त्रोत हैं। आपको सबसे ज्यादा किसने प्रभावित किया है ?

-बहुत सारे ऐसे शीर्ष स्तर के खिलाड़ी हैं जिन्हें मैं खेलते देखता हूं और उनका अनुशरण करता हूं। मुझे आनंद का खेल पसंद है लेकिन मुझे मैग्नस कार्लसन का खेल सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। वह एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं और जिस तरह से वह वर्तमान में खेल रहे हैं, वह मुझे उनका अनुशरण करने के लिए और मजबूर करता है।

-आप चौथे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर हैं। आपकी उम्र भी अभी महज 14 साल है। अब आपका सपना क्या है?

-हर किसी का एक सपना होता है। मेरा भी है। मेरा सपना 3000 ईएलओ अंकों तक पहुंचना है और विश्व चैंपियन बनने का है।

-शतरंज के अलावा आपको कौन सा खेल सबसे ज्यादा पसंद है ?

-मुझे टेबल टेनिस खेलना पसंद है। मैं क्रिकेट भी खेलता हूं लेकिन मैं इस खेल में अच्छा नहीं हूं। हालांकि मुझे मनोरंजन के लिए क्रिकेट खेलना पसंद है।

-आपकी बड़ी बहन भी शतरंज की खिलाड़ी है। क्या आप उनके साथ शतरंज खेलते हैं ?

-एक बार स्पेन में एक टूर्नामेंट में हम दोनों की जोड़ी बनाई गई थी इसलिए हमें अलग से तैयारी करनी पड़ी और आखिरकार मैं ही जीता। इसके अलावा हम घर पर एक-दूसरे के साथ बहुत अभ्यास करते हैं।

-आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद है, शतरंज खेलना या पढ़ाई करना?

-मुझे पढ़ने से ज्यादा शतरंज खेलना पसंद है।

-शतरंज एक दिमागी खेल है। ऐसे में आप अपने दिमाग को तेज करने के लिए क्या करते हैं ?

-मैं अपने खेल में अलग रणनीति बनाने की कोशिश करता हूं और अपने दिमाग को तेज करने केलिए नियमित रूप से अभ्यास करता रहता हूं। मैं रोजाना छह से सात घंटे अभ्यास करता हूं। 

Posted By: Vikash Gaur

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