जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा की वर्ष 2010 की जनहित याचिका पर सभी पक्षों को वर्षो तक सुनने के बाद मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय ओलिंपिक संघ (आइओए) की कमान प्रशासकों की एक समिति (सीओए) को सौंप दी। न्यायमूर्ति नज्मी वजीरी व न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि यदि कोई खेल महासंघ कानून का पालन नहीं करता है, तो उसे सरकार से कोई मान्यता प्राप्त नहीं होगी और उसे दिए जाने वाले लाभ और सुविधाएं तुरंत बंद हो जाएंगी।

पीठ ने कहा कि एक वैध निकाय खिलाड़ियों के कारण प्रतिनिधित्व करता है, जो भारतीय खेलों का असली चैंपियन होता है। निष्पक्षता और वैधता को सभी सार्वजनिक मामलों में शामिल करने की आवश्यकता होती है। खेल के नियमों का पालन ना करने वाली अडियल संस्थाएं अन्यायपूर्ण तरीके से जारी रहकर सरकार की उदारता और संरक्षण का आनंद लेती है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए।

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ बनाम राहुल मेहरा के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 18 मई 2022 के आदेश पर भरोसा करते हुए पीठ ने आइओए की कमान सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनिल आर दवे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सीओए को दी। इसमें पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाइ कुरैशी व विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव विकास स्वरूप भी होंगे। इसमें कंसल्टेंट स्पो‌र्ट्सपर्सन के तौर पर ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा, ओलिंपियन अंजु बाबी जार्ज और ओलिंपियन बोंबायला देवी लैशराम को रखा गया है।

पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि यदि आइओए द्वारा निर्धारित समयसीमा के अंदर अनुपालन नहीं किया जाता है, तो इसकी मान्यता निलंबित हो जाएगी। एनएसएफ या आइओए में स्थायी पद के लिए कोई जगह ना होने की स्थिति को देखते हुए पीठ ने आइओए में किसी व्यक्ति के लिए आजीवन अध्यक्ष और ऐसे किसी भी स्थायी पद को अवैध करार दिया।

राहुल मेहरा ने याचिका में आइओए और एनएसएफ द्वारा खेल संहिता और इसके बारे में न्यायिक निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने की मांग की थी। साथ ही अनुपालन नहीं करने वाले एनएसएफ को निलंबित या वापस लेने के साथ ही उन्हें दिए जाने वाले लाभों को तब तक बंद करने की का निर्देश देने की मांग की थी जब तक कि आइओए या एनएसएफ का गठन और प्रशासन खेल संहिता के अनुरूप नहीं हो जाता।

 

Edited By: Viplove Kumar