जागरण संवाददाता, रांची। भारतीय एथलीट भावना जाट ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप की 20 किमी पैदल चाल स्पर्धा में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के बाद इस साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया।

राजस्थान की 23 साल की इस एथलीट ने 1:29.54 सेकेंड के समय से स्वर्ण पदक जीता और ओलंपिक का टिकट हासिल किया जिसका क्वालीफिकेशन समय 1:31.00 सेकेंड था। किसान परिवार की भावना ने इस तरह पिछले साल अक्टूबर में राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान बनाए गए 1:38.30 सेकेंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में काफी सुधार किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वह 20 किमी पैदल चाल स्पर्धा में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली दूसरी भारतीय महिला एथलीट बनीं। उनसे पहले खुशबीर कौर ने इस स्पर्धा में 2016 रियो ओलंपिक में हिस्सा लिया था। वहीं, उत्तर प्रदेश की प्रियंका गोस्वामी 1:31.36 सेकेंड के समय से ओलंपिक कट से करीब से चूक गई जिसका आयोजन 24 जुलाई से नौ अगस्त किया जाएगा।

इससे पहले राष्ट्रीय रिकॉर्ड दिल्ली की बेबी सौम्या के नाम था जिन्होंने राष्ट्रीय पैदल चाल चैंपियनशिप 2018 (दिल्ली) में 1:31.29 सेकेंड का समय लिया था। भावना जयपुर में कोच गुरमुख सिहाग की देखरेख में खुद ही अभ्यास करती है। उन्होंने जूनियर या सीनियर स्तर के किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया है। वह भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआइ) के किसी शिविर का भी हिस्सा नहीं रही है। उन्होंने सीनियर स्तर पर 2016 में राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप से पदार्पण किया।

हैदराबाद में आयोजित इस प्रतियोगिता में वह 1:52.38 सेकेंड के समय के साथ पांचवें स्थान पर रही थी। केटी इरफान (पुरुषों की 20 किलोमीटर पैदल चाल), अविनाश साबले (पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज) एवं मिक्स्ड 477 ष्टद्धह्म(38) 77400 मीटर रिले टीम और नीरज चोपड़ा (पुरुष भाला फेंक) पहले ही एथलेटिक्स में टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं।

भावना के कोच गुरमुख ने कहा कि भावना ने डोप परीक्षण के लिए नमूना दिया है जिसका मतलब यह हुआ कि उनका राष्ट्रीय रिकॉर्ड मान्य रहेगा। भावना इसके बाद एशियाई पैदल चाल चैंपियनशिप में भाग लेंगी जो 15 मार्च से जापान में होगी। वहीं, पुरुष वर्ग में संदीप कुमार भले ही ओलंपिक क्वालीफाई करने से चूक गए लेकिन 20 किलो मीटर का स्वर्ण जीतने में सफल रहे। संदीप 01:21.34 सेकेंड के साथ पहले स्थान पर रहे।

भावना ने कहा कि मैं अभ्यास के दौरान 1:27.00 सेकेंड का समय ले रही थी। मुझे पता था कि अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो मैं ओलंपिक क्वालीफाइंग समय से कम समय में स्पर्धा को पूरा कर सकती हूं। यह पिछले कुछ महीने से की गई मेरी और कोच की मेहनत का नतीजा है। जो माहौल हमें यहां मिला वह कम ही मिलता है। चैंपियनशिप के लिए सही मौसम व माहौल ने हम लोगों में नई उर्जा का संचार किया जिसका परिणाम है कि मेरे व्यक्तिगत प्रदर्शन में सुधार हुआ और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में सफल रही।

मेवाड़ की लाड़ली करेगी टोक्यो में कमाल

राजस्थान के राजसमंद जिले के काबरा गांव की रहने वाली भावना के प्रदर्शन ने पूरे मेवाड़ में जोश भर दिया है। राजसमंद आदिवासी बहुल जिला है। भावना के पिता शंकरलाल जाट किसान हैं और इसके दो बडे भाई भी है।

स्कूल के दौरान भावना को कोचिंग देने वाले सुरेश जाट बताते हैं कि भावना करीब 10 वर्ष की उम्र से पैदल चाल में भाग ले रही हैं और उसके गांव के स्कूल में ही वहां के पीटी टीचर हीरालाल कुमावत भावना को कोचिंग देते थे। वहां सुविधाओं की कमी थी। इनके परिवार को मेरे बारे में पता चला तो परिवार वालों ने उन्हें उदयपुर में मेरे गांव खेरोदा भेज दिया। यहां मैं अपनी बहन सुनीता और अन्य 10-12 लड़कियों को कोचिंग देता था। इसके लिए गांव में ही हमने 200 मीटर का ट्रैक बना रखा था। सुरेश जाट ने बताया कि भावना ने उनसे 2014 से 2016 के बीच कोचिंग ली और कुछ पदक भी जीते। इसके बाद भावना की रेलवे में नौकरी लग गई।

कोचिंग के दौरान ही यह महसूस होने लगा था कि भावना कुछ बड़ा करेगी, क्योंकि उसकी तकनीक बहुत अच्छी थी। हम उसे यही कहते थे कि किसी भी हालत में चोट नहीं लगने देना। आज ये सुन कर बहुत अच्छा लगा रहा है कि मेवाड़ की यह बेटी अब ओलंपिक में जाएगी। भावना मेवाड़ से पहली लड़की हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। सुरेश जाट ने बताया कि रेलवे में नौकरी से पहले भावना ने विजयवाड़ा मे जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप रजत पदक जीता था जो उसका पहला पदक था।

Posted By: Sanjay Savern

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