पीएम मोदी का 25 वर्षों का राष्ट्र सेवा संकल्प: सांस्कृतिक जागरण और पर्यटन विकास से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली नई गति
प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के राष्ट्र सेवा संकल्प ने सांस्कृतिक जागरण और धार्मिक पर्यटन के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था ...और पढ़ें

HighLights
सांस्कृतिक जागरण और धार्मिक पर्यटन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।
अयोध्या, काशी जैसे स्थलों के विकास से करोड़ों का राजस्व सृजन।
'वेड इन इंडिया' अभियान ने घरेलू पर्यटन और विवाह उद्योग बढ़ाया।
शिवप्रकाश। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के असंख्य कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 25 वर्षों में किये गए राष्ट्र सेवा के अनवरत कार्यों से देश को परिचित कराया। आशीर्वाद का दिया जलाकर उनके प्रति अनंत शुभकामनाएं प्रेषित की गयी। उल्लेखनीय विकास केन्द्रों का प्रवास , आंगनवाड़ी बहिनों का सम्मान , प्रभावी व्यक्तियों से संपर्क आदि के माध्यम से समाज के सभी व्यक्तियों से संपर्क का यह अभिनव अभियान था।
7 अक्टूबर को देश के हजारों स्थानों पर लाखो नागरिको ने “we will do it” के उद्घोष के साथ 2047 तक भारत को विकसित बनाने का संकल्प भी लिया गया। विगत 25 वर्षों में मोदी जी ने भारत के आर्थिक उत्थान के साथ – साथ विश्व में भारत का सांस्कृतिक गौरव भी स्थापित किया है।
भारत में धर्म केवल पूजा-पाठ एवं कर्मकांड तक सीमित नही समाज धारणा एवं कर्तव्य भाव भी सिखाता है। वैशेषिक दर्शन में महर्षि कणाद ने धर्म को व्याख्यायित करते हुए कहा कि "यतोऽभ्युदयनिःश्रेयससिद्धिः स धर्मः।" जिसके अनुसार धर्म मनुष्य जीवन के दोनों पक्षों नैतिक एवं आर्थिक उन्नति की व्याख्या करता है। जब इसी विषय को सरकार के सन्दर्भ में विचार करेंगे तब अभ्युदय का अर्थ रोजगार , कृषि , इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञान , महिला , वंचित आदि का सम्मान करते हुए आर्थिक विकास की नीतिया बनाना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांस्कृतिक उत्थान के कार्यों के माध्यम से आर्थिक प्रगति के लिए महत्त्वपूर्ण प्रयास किये है। विपक्ष सांस्कृतिक उत्थान के होने वाले कार्यो को आलोचना की दृष्टि से देखता था। इन धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में हुए प्रयासों के कारण आर्थिक व्यवस्था में कितना परिवर्तन आया है यह अध्ययन का विषय है । जिसको कुछ उदाहरणों से समझा जा सकता है।
जब किसी धार्मिक स्थल का विकास होता है । तब केवल मंदिर परिसर ही नही वहां का सम्पूर्ण चित्र बदलता है। सड़के पर्यटकों के आवागमन के योग्य बनती है । रेलवे, एअरपोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट, दुकानदार, स्थानीय आवागमन के साधनों का उपयोग , हस्तशिल्प , स्थानीय उत्पादों की बिक्री आदि के द्वारा संपूर्ण जन-जीवन में परिवर्तन आता है।
धार्मिक व्यवस्था से जुड़े गाइड , पुष्पमाला बेचने वाले एवं प्रसाद बेचने वाले दुकानदार सभी के जीवन में खुशहाली आती है। भारत सरकार की प्रसाद(Prasad) योजना के द्वारा यह सब संभव हुआ है । प्रसाद योजना के अंतर्गत 54 प्रकल्पो पर 1726.74 करोड़ का बजट निर्धारित हुआ । एक अनुमान के अनुसार प्रसाद योजना के परिणाम स्वरुप 5000-8000 करोड़ की आर्थिक गतिविधि अब तक हुई है।
भारत में लगभग 20 लाख सनातनी आस्था (मंदिर ) के स्थान है। 60 % पर्यटन धार्मिक पर्यटन है। जीडीपी में 5.22 प्रतिशत एवं रोजगार में 13.34 % का योगदान हैं । लगभग 7.5 करोड़ रोजगार धार्मिक एवं उससे संबंधित गतिविधियों से मिलता है।
गुजरात सरकार के बजट के आधार पर 2024-25 में सोमनाथ मंदिर के दर्शन के लिए प्रतिदिन 25000 श्रद्धालु आते है । वर्ष भर में लगभग 97 लाख लोगो ने अपने आराध्य के दर्शन किये। 2013 में 70 – 75 लाख श्रद्धालुओ ने दर्शन लिए थे। लगभग 26% की वृद्धि हुई है। लगभग 1500- 1800 करोड़ की वार्षिक आर्थिक गतिविधि सोमनाथ तीर्थ दर्शन के कारण होती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है। 2014 के पूर्व एवं पश्चात् के काशी में धरती आसमान का अंतर काशीवासी अनुभव करते है। मोदी जी का काशी से चुनाव लड़ना अपना सौभाग्य भी मानते है। 13 दिसंबर 2022 को काशी कोरिडोर के प्रथम चरण का उद्घाटन 339 करोड़ की लागत से संपन्न हुआ। काशी पुनर्निर्माण से पहले 70 -80 लाख तीर्थयात्री प्रतिवर्ष आते थे।
अब लगभग 2025 में 7 करोड़ श्रद्धालु काशी में दर्शन के लिए आए। 2021 से 2025 तक 25.28 करोड़ दर्शनार्थियों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किये। संपूर्णानंद संस्कृत विश्व विद्यालय के प्राध्यापक प्रो० राजनाथ के अनुसार प्रति व्यक्ति लगभग 5000 रुपये भी खर्च करता है तब 1.25 लाख करोड़ का आर्थिक व्यापार होता है । जिसके कारण पर्यटन आय में 65 % की वृद्धि हुई है। काशी , काशी – तमिल संगमं के माध्यम से उत्तर – दक्षिण की एकात्मता का माध्यम भी बनी है।
लंबे संघर्ष के उपरांत निर्मित भव्य मंदिर के निर्माण के उपरांत अयोध्या की सम्पूर्ण आर्थिकी ही परिवर्तित हो गयी। आई आई एम लखनऊ के एक अध्ययन के आधार पर वर्ष में पहले 1.7 लाख तीर्थयात्री आते थे। दुकानदारो की प्रतिदिन आय 400- 500 रु तक होती थी। 2025 में 29.95 करोड़ श्रद्धालुओ ने भगवान राम के दर्शन किये।
अयोध्या का जीएसटी संग्रह का 400 करोड़ है। 2028 तक पर्यटन राजस्व संग्रह का अनुमान 18000 करोड़ है l जो वर्तमान में 10000 करोड़ प्रतिवर्ष है। व्यापारिक आय में 5 गुना वृद्धि हुई है। रेस्टोरेंट 200 से बढ़कर 2000 हुए एवं बैंक शाखाएं 15 से बढ़कर 60 हुई है। होटल एवं होम स्टे में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश को पर्यटन विभाग एवं अयोध्या के कारण 2025 में 20000 से 25000 करोड़ का अतिरिक्त कर प्राप्त हुआ है।
11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा महाकाल लोक का उद्घाटन होने के बाद 2019 की तुलना में तीर्थयात्रियों में 50% की वृद्धि हुई है। पहले 20-25 हजार श्रद्धालु दर्शन करते थे अब 80 हजार से 1 लाख श्रद्धालु दर्शन करते है। अब इंदौर एवं उज्जैन आर्थिक विकास के कारण एक होने की स्थिति में है। मध्य प्रदेश में पर्यटन के कारण 89. 21 प्रतिशत वृद्धि हुई है जिसमे महाकाल तीर्थयात्रियों का बड़ा योगदान है।
2013 की केदारनाथ में आई आपदा का निरीक्षण करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आये थे, उसी समय श्री केदारनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प भी उन्होंने लिया था। आल वेदर रोड , ऋषिकेश से कर्ण प्रयाग रेलवे लाइन , वायु सेवा आदि के द्वारा अब उत्तराखंड में आदि कैलाश साहित चारों धामों में पर्यटन में बहुगुणित वृद्धि हुई है। केवल केदारनाथ जी में 2025 में 1656539 तीर्थयात्री पहुंचे। 2025 के पहले डेढ़ मास में ही 300 करोड़ का रेवन्यू प्राप्त हुआ था। मोदी ध्यान गुफा की एक रात की बुकिंग 11000 रु है जिससे 2025 में विश्राम गृहों सहित 3.8 करोड़ की आय प्राप्त हुई थी।
प्रयाग में आयोजित महाकुम्भ ने तो विश्व रिकॉर्ड ही बनाया है । दुनिया के लिए महाकुंभ की व्यवस्था शोध का विषय है। महाकुम्भ सम्पूर्ण विश्व के लोगो को जोड़ने का माध्यम भी बना है। आंकड़ों के अनुसार 66 करोड़ से अधिक लोगो ने मां गंगा में डुबकी लगायी थी। उत्तर प्रदेश सरकार को कुंभ के द्वारा 500 करोड़ की अतिरिक्त जी एस टी के माध्यम से आय हुई। 1.5 लाख करोड़ पर्यटन के कारण राजस्व प्राप्त हुआ। सरकार ने महाकुंभ क्षेत्र के विकास के लिए 6982 करोड़ खर्च कर 2 -3 लाख करोड़ राजस्व आय प्राप्त की। लगभग 6 लाख से अधिक लोगों को रोजगार भी प्राप्त हुए।
श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व नासिक के काला राम मंदिर के दर्शन कर 11 दिन के लिए अलग – अलग मंदिरों में प्रधानमंत्री मोदी जी संकल्प पूर्ति के लिए गए थे। वीरभद्र मंदिर लेपाक्षी , गुरुवायूर केरलं , श्रीरामा स्वामी मंदिर त्रिशूर केरल , श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर तमिलनाडु , रामेश्वरम एवं धनुषकोडी के दर्शन उन्होंने किये थे।
मान्यतानुसार भगवान श्रीराम का इन्ही सभी मंदिरों से अपने वनवास काल में सम्बन्ध आया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस यात्रा के कारण इन सभी स्थानों पर तीर्थयात्रियो में वृद्धि के कारण अर्थव्यवस्था में परिवर्तन आया है।
नवम्बर 2023 की मन की बात में “वेड इन इण्डिया” का आह्वान भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था।
विदेश में भारतीय वर्ष भर में लगभग 5000 शादियां करते थे । जिसका अनुमानित खर्च 1 लाख करोड़ होता था। पर 2025 के अनुमान अनुसार 46 लाख विवाहो में लगभग 6.5 लाख करोड़ का कारोबार हुआ। होटल , हवाई सेवा , यातायात संसाधन , आभूषण , वस्त्र , हलवाई , सजावट आदि सभी का व्यापार भारत में विवाह होने से बढ़ता है । भारत में विवाह होने पर 25000 -50000 करोड़ की संभावित बचत होगी।
सम्राट हर्षवर्धन एवं महारानी अहिल्याबाई होलकर के पश्चात् भारत के इतिहास में सांस्कृतिक जागरण का कार्य करने वाले मोदी जी प्रथम राजनीतिक नेता होंगे । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की आर्थिक प्रगति को भी एक दिशा दी है। वेड इन इण्डिया (Wed In India) प्रयोग आत्मनिर्भर भारत तथा भारतीय स्थानों के सौंदर्य का बोध भी विश्व को कराता है। जिसके कारण वैश्विक पर्यटन का विकास भी होता है।
तीर्थाटन द्वारा आर्थिक प्रगति में हम तिरुपति , वैष्णो देवी सहित अनेक स्थानों का अध्ययन भी कर सकते है। प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करने वाले उनके इस दिशा में किये प्रयत्नों का अध्ययन भी करे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चिंतन प्रतिपल 140 करोड़ नागरिको के लिए है जो उनमे अन्तर्निहित जनसेवा से राष्ट्रसेवा के भाव को प्रकट करता है।
लेखक भाजपा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री हैं।
