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खेल गांव में पार होती थी रंगीनियत की हद

लंदन ओलंपिक खेलों के समापन के साथ 200 से ज्यादा देशों के एथलीट खेल गांव छोड़कर खट्टी-मीठी यादों के साथ अपने-अपने देश लौट गए हैं। लंदन ओलंपिक खेलों को ब्रिटेन के इतिहास का सबसे सफल और भव्य खेल आयोजन करार दिया जा रहा है। मेहमान खिलाड़ियों ने मेहमाननवाजी की जमकर तारीफ की लेकिन अब खेल गांव क

By Edited By: Published: Fri, 17 Aug 2012 08:03 AM (IST)Updated: Sat, 18 Aug 2012 08:17 AM (IST)
खेल गांव में पार होती थी रंगीनियत की हद

नई दिल्ली [जेएनएन]। लंदन ओलंपिक खेलों के समापन के साथ 200 से ज्यादा देशों के एथलीट खेल गांव छोड़कर खट्टी-मीठी यादों के साथ अपने-अपने देश लौट गए हैं। लंदन ओलंपिक खेलों को ब्रिटेन के इतिहास का सबसे सफल और भव्य खेल आयोजन करार दिया जा रहा है। मेहमान खिलाड़ियों ने मेहमाननवाजी की जमकर तारीफ की लेकिन अब खेल गांव की रंगीनियत की खबरें छन-छन कर सामने आने लगीं हैं।

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कुछ ब्रिटिश एथलीटों ने बताया कि ओलंपिक में दिन जितना ही कड़ा होता था, रात उतनी ही रंगीन हुआ करती थीं। वे दिन भर खूब पसीना बहाते थे और रात में खेल गांव में जमकर मस्ती करने से नहीं चूकते थे। खेल गांव में उन्होंने अन्य देशों के खिलाड़ियों से मुलाकात की और कई दोस्त भी बनाए। ब्रिटेन की टीम के एक सीनियर खिलाड़ी ने खेल गांव की अंदर की कहानी बताते हुए कहा कि खेल गांव में रात में एथलीट नए दोस्त बनाने में मशगूल हो जाते थे। लगभग सभी एथलीट हर रात नए साथी के साथ अपने-अपने कमरों में जीत का जश्न मनाते थे। पहले हफ्ते तो ऐसा बहुत कम देखने को मिला, क्योंकि सभी एथलीटो का पूरा ध्यान अपनी-अपनी स्पर्धा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर था, लेकिन एक बार स्पर्धा खत्म हो जाने के बाद सभी मौज-मस्ती के आलम में डूब गए।

लंदन ओलंपिक में मौजूद करीब दस हजार एथलीटों के लिए खेल गांव में डेढ़ लाख कंडोम मुहैया कराए गए थे, जो समापन समारोह के पहले ही खत्म हो गए। अमेरिकी महिला फुटबॉल टीम की गोलकीपर होप सोलो ने बताया कि खेल गांव में कंडोम की भरपूर मांग थी। 2008 बीजिंग ओलंपिक को याद करते हुए उन्होंने बताया, 'वहां तो लंदन से ज्यादा खुलापन था।'

एक ब्रिटिश एथलीट ने बताया, 'एथलेटिक्स के खिलाड़ी, तैराक और मुक्केबाजों को अच्छा पार्टनर माना जाता है। रात में होने वाली इन गतिविधियों में घुड़सवारी और नौकायन जैसे खेलों के खिलाड़ी बहुत कम ही लिप्त हुआ करते थे। वे अपने आप को कथित रूप से उच्च श्रेणी का मानते थे और रात में घर के बाहर किसी अंजान के साथ रात बिताना उन्हें या उनके घर वालों को पसंद नहीं होता था।'

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