सुनील अग्रवाल, सुंदरगढ़ : प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को गांधी जयंती के देश को साफ-सुथरा रखने के उद्देश्य से स्वच्छता की मुहिम छेड़ते हुए देश की जनता से इसमें सहयोग का आह्वान किया। उनके इस आह्वान के बाद राज्य सरकारें और उनके अधीन आने वाले सभी विभागों समेत स्थानीय स्तर तक के अधिकारी कर्मचारियों में तेजी देखी गई। विभिन्न, सरकारी गैर सरकारी संस्थाएं, सामाजिक संगठन एवं कॉर्पोरेट जगत ने भी आगे आकर हाथ बंटाया। लेकिन 2018 आते-आते स्वच्छता की आंच धीमी होती चली गई। रेलवे सहित कुछ केंद्रों व संस्थानों छोड़ बाकी दो अक्टूबर को हाथ में झाड़ू ले फोटो सेशन कराते हैं। ऐसे में अपवाद स्वरूप एक चेहरा सभी के सामने उभर कर आया हैं वह हैं आदिवासी बहुल जिला सुंदरगढ़ जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर कुतरा ब्लाक कार्यालय से 15 किलोमीटर दूर पुर्कापाली पंचायत के एक छोटे से गांव नया कदोपाडा की रहने वाली 60 वर्षीय मारियम डुंगडुंग। जो वर्षों से अपने घर को छोड़ कुतरा बस स्टैंड को अपना घर बना हाथों में झाड़ू लिए निस्स्वार्थ भाव से निरंतर इस इलाके की सफाई करती है।

इन्हें लोग मरियम के नाम से कम मकर माई के नाम से ज्यादा बुलाते है। ओडिया भाषा में मकर का अर्थ है दोस्त एवं मरियम ने सफाई को अपना दोस्त बना खुद को ग्रामवासी द्वारा दिए गए अपने नाम को सार्थक कर रही है। धूप,बारिश तथा ठंड के दिनों में भी बिना किसी की परवाह किए यह अपना काम करती है तथा शाम को किसी भी दुकान के बरामदे को अपना रैन बसेरा बना सो जाती हैं। इनके दिल में बस एक ही नशा है बस स्टैंड इलाके की सफाई। यही कारण है कि यह इलाका प्राय: साफ दिखता है। इस काम के लिए मकर माई के मन में कोई लालच नहीं है। स्थानीय गांववासी तथा दुकानदार स्वेच्छा से जो कुछ दे देते हैं वह उसे ही अपना पारिश्रमिक मानकर स्वीकार कर लेती हैं। कभी कभार शेष बचे पारिश्रमिक को 15 किलोमीटर दूर अपने घर जा कर परिजनों को देकर वापस बस स्टॉप पर लौट आती है।

Posted By: Jagran