संवादसूत्र, राजगांगपुर : कोरोना के चलते जारी लॉकडाउन में प्रवासियों का घर लौटने का सिलसिला जारी है। राजगांगपुर के सुरुडी गांव निवासी जुगल किशोर केरकेटटा केरल के आलूवा में एक कंपनी में ठेकेदार के अधीन काम कर रहा था। अचानक लॉकडाउन में काम बंद हो गया। उसने बचे पैसे से एक साइकिल खरीदी और 11 दिनों में 1500 किलोमीटर सफर कर घर लौटा।

लॉकडाउन में काम बंद हो जाने के बाद जुगल को उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में काम फिर से शुरु हो जायेगा, पर धीरे धीरे यह घटने के बजाय बढ़ता ही चला गया। इससे उसे अपने घर जाने की चिता सताने लगी। उसके पास कुछ पैसे बचे थे एवं कुछ पैसे घर से मंगवाकर 6200 रुपये में एक साइकिल खरीदी और अपना सामान एक बैग में बांधकर पीछे लटका कर घर की ओर चल पड़ा। दिन रात साइकिल चला कर 11 दिनों में 1500 किलोमीटर की दूरी तय कर राजगांगपुर पहुंच गया। यहां पहुंचने पर सरकारी अस्पताल में जांच करने के बाद उसे कम्यूनिटी कमेटी सेंटर में बने क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है। जुगल ने बताया कि जिस राज्य और जिले से वह गुजरा सभी जगहों पर विभिन्न सेवाभावी संगठनों से खाने-पीने की पूरी सुविधा मिली। कहा कि सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि महामारी होगी और 15 सौ किलोमीटर साइकिल चला कर घर लौटना पड़ेगा। अब भले ही कम कमाई हो पर कभी परदेश में काम करने के लिए नहीं जाएगा।

Posted By: Jagran

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