संवाद सूत्र, राजगांगपुर : राजगांगपुर थाना अंतर्गत केसेरामाल गाव में अंग्रेजों के जमाने में बनाया गया सेंट फ्रांसिस जेवियर कैथोलिक चर्च पूरे जिले के ईसाई धर्मावलंबियों की आस्था का सबसे पुराना केंद्र है। इस चर्च के मौजूदा फादर विनसेंट बागे के अनुसार सन् 1908 में अंग्रेज झारखंड के रांची में आए थे। उन्होंने वहीं से अपनी देखरेख में राजगांगपुर से लगभग सात किलोमीटर दूर केसरामाल में इस कैथोलिक चर्च का निर्माण कराया गया था। जिसका नाम सेंट फ्रांसिस जेवियर कैथोलिक चर्च रखा गया। 1908 में शुरूआत इस चर्च के पहले फादर एस जे लुईस कार्डोंन एक वर्ष अपनी सेवा देने के बाद 1909 से 1918 और 1909 से 1915 के बीच एस जे एडवर्ड एलेरी और एस जे सिलवैन ग्रोसजिन ने फादर के रूप में इस चर्च में अपनी सेवा दी। इसी चर्च में 1908 में आए फादर एस जे सेवरिन लुइस कार्डोंन ,एवं एडवर्ड एलरी की समाधि स्थल भी है।

केसरामाल अंग्रेजों द्वारा बनाए गए इस चर्च को आज 111 वर्ष बीत चुके हैं। पूरे जिले में एक ही चर्च होने के कारण जिले के ईसाई समाज के लोग केसरामाल चर्च में प्रार्थना करने के लिए आते थे 1908 से लेकर 1948 तक सेंट फ्रांसिस जेवियर कैथोलिक चर्च को अंग्रेज फादर द्वारा चलाया गया था। उसके बाद स्थानीय फादर द्वारा इस चर्च की कमान अपने हाथ में लेकर इसे अब तक चलाया जा रहा है ।

क्रिसमस के त्योहार की चल रही जोरदार तैयारी :

इस चर्च में 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार मनाने को लेकर सभी धर्मावलंबी व चर्च के सदस्य तैयारियों में जुटे हैं। इस चर्च के अलावा आसपास के गिरजाघरों की साफ सफाई का काम शुरू हो चुका है। फादर विनसेंट बागे ने बताया है 25 दिसंबर को क्रिसमस के इस त्योहार में आसपास अंचल से 36 गांव से लगभग पांच हजार से सात हजार लोग यहा प्रार्थना के लिए आते हैं। इस अवसर पर गिरजाघर में प्रभु यीशु की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ से पूरा परिसर खचाखच भरा रहता है।

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