सुंदरगढ़, मो. शबीर। Acharya Rafiq Khan. पाखंड में डूबी धर्म की व्याख्याएं हमारी सोच को संकीर्ण बनाती हैं। स्वामी विवेकानंद ने इन्हीं संकीणर्ताओं से ऊपर ऊठकर मानवतावाद का सिद्धांत दिया था। इसके मूल में धर्म, जाति, समुदाय से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता के कल्याण की परिकल्पना है..। यह कहना है आचार्य रफीक खान का। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित यह शिक्षक ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के हिमगिर प्रखंड स्थित लुआबहाल प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ समाज को सुशिक्षित बनाने में भी जुटा है।

स्वामी विवेकानंद के विचारों, भारतीय दर्शन और संस्कृति से रफीक खान इस कदर प्रभावित हैं कि उन्होंने योग और वैदिक दर्शन के प्रचार-प्रसार में अपना जीवन समर्पित कर दिया है। रफीक मुस्लिम हैं, लेकिन गायत्री मंत्र से लेकर तमाम वैदिक मंत्रों का नियमित रूप से जाप करते हैं। राम और रहीम दोनों के प्रति वह समान श्रद्धा रखते हैं और योग को स्वस्थ रहने के लिए जरूरी मानते हैं। अपने शिक्षण कार्य से समय निकाल कर वह नियमित रूप से गांवों में घूम-घूम लोगों को योग के माध्यम से भारतीय जीवन दर्शन और वैदिक दर्शन का मर्म समझाते हैं। लोगों को योग और विवेकानंद दर्शन से जोड़ने के साथ साथ वह सर्वधर्म सद्भाव का भी संदेश दे रहे हैं।

रफीक योग की शिक्षा देते हैं इसलिए लोग उन्हें आचार्य रफीक खान के नाम से जानते हैं। उनके योग शिविरों में भीड़ देखते ही बनती है। इन शिविरों में जब लोग उन्हें गले में भगवा पट्टा लटकाए, आसन-प्राणायाम करते हुए और संस्कृत श्लोकों-मंत्रों का धाराप्रवाह उच्चारण करते देखते-सुनते हैं तो सहसा उन्हें भरोसा नहीं होता कि श्लोक पाठ करने वाला योगशिक्षक मुस्लिम धर्मानुयायी है। आचार्य रफीक कहते हैं, लेकिन इसमें मुझे कोई अजूबा नहीं लगता। हमारे देश की संस्कृति की यही खासियत है। जहां अच्छाई है, उसे सभी को अपनाना चाहिए। मेरे लिए गायत्री मंत्र और नमाज दोनों इबादत और श्रद्धा के लिहाज से बराबर महत्व रखते हैं। मैं वेद पाठ भी करता हूं और नमाज भी पढ़ता हूं..।

स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों और संदेशों की चर्चा करते हुए रफीक कहते हैं कि स्वामीजी ने मानवता को सबसे बड़ा धर्म बताया था। मेरे विचारों में भी यही सबसे बड़ा धर्म है। योग और वैदिक दर्शन के प्रचार-प्रसार का काम जीवन भर जारी रहेगा। स्वामी जी ने ही कहा था कि मंजिल तक पहुंचने से पहले रुको मत। इसी सिद्धांत के तहत लक्ष्य की ओर बढ़ रहा हूं।

आचार्य रफीक ने पतंजलि योग पीठ से योग की विधिवत शिक्षा ली है। वहीं से इन्हें आचार्य की उपाधि दी थी। कहते हैं, शुरू में मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने विरोध किया था, लेकिन धीरे-धीरे सबकुछ सामान्य होता गया। हां, मेरे घर के लोगों ने भरपूर साथ दिया। इसके बाद समाज वाले भी मान गए। उन्हें समझाया कि सभी धर्म मानवता का संदेश देते हैं। आप भले ही किसी धर्म में पैदा हुए हों, लेकिन सभी धमरें का सम्मान करना चाहिए।

अब सूची में कई मुस्लिम नाम

आचार्य रफीक कहते हैं कि योग की तरह गायत्री मंत्र में बहुत सारे गुण हैं। इसके जप से सेहतमंद रह सकते हैं। अन्य वैदिक मंत्रों में भी अलौकिक शक्ति है। अब उनकी सूची में कई मुस्लिम नाम भी हैं जिन्होंने योग के बूते खुद को सेहतमंद बनाया है। वह हर मुसलमान को योग अपनाने की सलाह भी देते हैं। कहते हैं कि धार्मिक संकीर्णता से ऊपर उठ कर ही हम अच्छा समाज बना सकते हैं।

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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