संवाद सूत्र, संबलपुर : शहर के सर्वपुरातन नंदपाड़ा स्थित बालुंकेश्वर बाबा मंदिर में प्रसिद्ध शीतलषष्ठी यात्रा को लेकर पारंपरिक रस्म शुरू हो गयी है। शनिवार की शाम रीति रिवाज के साथ बालुंकेश्वर बाबा की सगाई माता पार्वती के साथ संपन्न हो गयी। लॉकडाउन को लेकर जारी दिशानिर्देशों के तहत सादगी के साथ सगाई की यह पूरी रस्म संपन्न हुई।

बालुंकेश्वर बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद बालुंकेश्वर बाबा के धर्मपिता रामचरण मिश्र समेत सप्तऋषि विजय मिश्र, कंपाल होता, गोलकबिहारी मिश्र, दीनबंधु पाणिग्राही, शशांक शेखर नंद, हरिहर गुरु, चक्रधर मिश्र समेत मंदिर के पूजक लक्षपति महापात्र और यात्रा आयोजन कमेटी के मुख्य संयोजक फणीभूषण मिश्र, अमूल्य कुमार मिश्र, प्रफुल्ल कुमार होता, समीररंजन बाबू आदि सगाई के सामान के साथ बालुंकेश्वर बाबा के विवाह के लिए योग्य वधू की तलाश करते हुए स्थानीय अईंठापाली के शुभश्री विहार निवासी शुकांत वीसी और पत्नी रिकी बाबू के घर पहुंचे। वहां एक विवाह योग्य कन्या के होने का पता चला था। माता पार्वती के धर्मपिता शुकांत और माता रिकी ने बालुंकेश्वर बाबा के पिता समेत सप्तऋषि और अन्य का स्वागत कर घर के अंदर ले गए और उनके आने के बारे में पूछा। तब बालुंकेश्वर बाबा के धर्मपिता ने आने के बारे में बताने समेत माता पार्वती के साथ बालुंकेश्वर बाबा के विवाह का प्रस्ताव रखा। तब माता पार्वती के धर्मपिता और माता ने बालुंकेश्वर बाबा के बारे में जानना चाहा। जब उन्हें पता चला कि बालुंकेश्वर बाबा शरीर में राख मलकर भूत पिशाच के साथ रहते हैं और उनका अपना कोई घर ठिकाना भी नहीं है, तब उन्होंने अपनी लाडली बेटी पार्वती का विवाह बालुंकेश्वर बाबा से करने पर मना कर दिया। तब सप्तऋषियों ने पवित्र मंत्र और श्लोक के साथ बालुंकेश्वर बाबा की महिमा का गुणगान किया। इसके बाद माता पार्वती के धर्मपिता-माता विवाह के लिए राजी हुए और इसके बाद पारंपरिक रीति रिवाज के साथ बालुंकेश्वर बाबा और माता पार्वती की सगाई संपन्न हुई।

Posted By: Jagran

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