संबलपुर, जेएनएन। केंद्र में सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने संलबपुर को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आइआइएम) का तोहफा दिया था। तीन साल बाद इस संस्थान के स्थाई कैंपस का निर्माण करने के लिए 401.94 करोड़ रुपये खर्च का आकलन भी किया है, लेकिन स्थाई कैंपस के लिए जमीन को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच खींचतन इसकी राह में बाधक बना हुआ है। इन सबके बीच आइआइएम के छात्र छात्राओं और निदेशक महादेव जायसवाल को भरोसा है कि जमीन की समस्या का समाधान जल्द हो जाएगा और उपनगर बुर्ला निकटस्थ बसंतपुर में आइआइएम के स्थाई कैंपस के लिए जमीन मिल जाएगी।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में संबलपुर आइआइएम शुरू हुआ था। अस्थाई तौर पर इसके लिए सासन स्थित सिलिकॉन इंस्टीट्यूट को चुना गया। आइआइएम जैसे राष्ट्रीय संस्थान के लिए केंद्र सरकार ने स्थाई कैंपस निर्माण कराए जाने का निर्णय लिया। गुरु दिवस के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता

में आयोजित केंद्रीय केबिनेट की बैठक में संबलपुर आइआइएम समेत देश के अन्य कुछ आइआइएम के लिए स्थाई कैंपस निर्माण व कार्यकारिता को मंजूरी मिली है। केंद्र सरकार के इस निर्णय से संबलपुरवासियों में खुशी की लहर फैल गई है। खासकर उन लोगों में जिन्होंने आइआइएम के लिए प्रयास किया था और कई बार केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर सपने को साकार कर दिखाया।

संबलपुर आइआइएम के स्थाई कैंपस के लिए केंद्रीय केबिनेट की मंजूरी के बाद संस्थान के निदेशक महादेव

जायसवाल के अनुसार, स्थाई कैंपस के लिए बुर्ला के निकटस्थ बसंतपुर में जमीन मिलनी है लेकिन ओडिशा सरकार 100 साल के लिए लीज पर जमीन देने को तैयार नहीं, जबकि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय का मानना है कि राष्ट्रीय संस्थान आइआइएम के लिए अलग अलग प्रदेशों के सरकार ने निश्शुल्क जमीन दिया है। ओडिशा सरकार को भी आइआइएम के लिए नि:शुल्क जमीन देनी चाहिए।

इसी को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच पेंच फंस गया है लेकिन माना जा रहा है कि यथाशीघ्र ही इसका समाधान हो जाएगा और केंद्र सरकार द्वारा तय अवधि 2021 तक स्थायी कैंपस शुरू हो जाएगा।वर्तमान संबलपुर आइआइएम का अस्थायी कैंपस बुर्ला स्थित संबलपुर विश्वविद्यालय परिसर में चल रहा है।

Posted By: Babita