संसू, संबलपुर : रक्तदान, नेत्रदान और अंगदान के बाद संपूर्ण शरीरदान के क्षेत्र में संबलपुर को एक नई पहचान मिली है। स्वेच्छाकृत रक्तदान संस्था-उत्सर्ग की ओर से आयोजित वार्षिकोत्सव में दस लोगों ने संपूर्ण शरीरदान करने का संकल्प पत्र हस्ताक्षरित किया। संपूर्ण शरीर दान करनेवालों में उत्कल प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सह अशोक जालान फाउंडेशन के चेयरमैन इंजीनियर अशोक जालान और उनकी धर्मपत्नी मनोरमा जालान समेत मीडियाकर्मी सुश्री गार्गी शत्पथी और उनकी मां शिक्षिका तिलोत्तमा शत्पथी भी शामिल है। संपूर्ण शरीरदान कार्यक्रम का संचालन करते हुए उत्सर्ग के डॉ. विजय प्रधान ने बताया कि अंगदान और शरीरदान को पुराण में भी महानदान बताया गया है। मृत्यु के बाद मिट्टी में मिल जाने वाले शरीर का नई तकनीक से सदुपयोग अब संभव हो गया है। मृत व्यक्ति का अंग निकालकर अन्य व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित कर उसे नई ¨जदगी दी जा सकती है। इसके प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है और इसी का नतीजा है कि 113 लोगों ने मरणोपरांत संपूर्ण शरीरदान करने का संकल्प लेते हुए संकल्पपत्र हस्ताक्षरित किया है। इनमें से 9 की मौत हो चुकी है और उनका संपूर्ण शरीर बुर्ला स्थित वीर सुरेंद्र साय इंस्टीच्युट आफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च को सौंपा जा चुका है। इस अवसर पर इंजीनियर अशोक जालान, मनोरमा जालान, तिलोतमा शतपथी एवं पुत्री गार्गी शतपथी, बरगढ़ की सुरेश्वरी पंडा, संबलपुर की धनेश्वरी बेहेरा, शकुंतला षाड़ंगी, नरेश कुमार हरेश, जुजुमुरा के सुशांत बारिक, सूर्यकांत पाणिग्राही को मरणोपरांत शरीरदान करने का संकल्पपत्र हस्ताक्षरित करने के लिए कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. हिमांशु आचार्य डॉ. कंचन राय और डॉ. अश्विनी नायक ने सम्मानित किया।

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