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संबलपुर, जेएनएन। बीते शुक्रवार की आधी रात के बाद से रविवार की सुबह तक नगर और इसके आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शहर के कई इलाकों में घुटने से अधिक पानी जमा हो गया तो कहीं बारिश से कच्चे घर ढह गए। भोई टिकिरा गांव में पिछले साल की तरह इस बार भी बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए गांव के 29 परिवार के 105 सदस्यों को सुरक्षित निकालकर बाबूबंध अपर प्राइमरी स्कूल में पहुंचाने के साथ भोजन पानी की व्यवस्था की गई। 

मौसम विभाग ने शनिवार को संबलपुर समेत बरगढ़, झारसुगुड़ा और सोनपुर जिला के लिए चौबीस घंटे का रेड अलर्ट जारी किया था। इस अलर्ट के जारी होने से पहले ही संबलपुर में मूसलाधार बारिश शुरू हो चुकी थी। इस बारिश से शहर के गोलबाजार इलाके में एक और मोतीझरन इलाके में तीन घर ढह गए। ऐसे में इलाके के 90 लोगों को आश्रय केंद्र में भेजा गया। प्रधानपाड़ा, मोतीझरन, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के कई घरों में पानी घुस गया। संबलपुर रेल स्टेशन के सामने चौक समेत लक्ष्मी टॉकीज चौक, एसआरआइटी कॉलोनी में घंटों जलजमाव देखा गया।

गंगाधर मेहेर यूनिवर्सिटी के सामने भी नाली नहीं होने से मार्ग जलमग्न हो गया। बताया गया है कि विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर गली सड़कों को बारंबार बनाया गया। लेकिन नाली नहीं होने से ऐसा जलजमाव हो रहा है। जहां पर नाली नाला है उनमें कचरा होने से पानी उफनाकर सड़कों फैल जाता है। शनिवार की बारिश के दौरान भूतापाड़ा में 44 वर्षीय रम्या मुंडा की मौत हो गई। धनुपाली थाना अंतर्गत वीर सुरेंद्र साय स्टेडियम के सामने बरगछ पाड़ा निवासी मोतीलाल मुंडा, पत्नी रम्या मुंडा अपने परिवार के साथ शुक्रवार की रात सोये हुए थे। तभी उनके कच्चे घर की दीवार ढह गयी। जिसके नीचे दब जाने से रम्या की मौत हो गई। इस संबंध में पुलिस अपमृत्यु का मामला दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिवार को सौंप दिया।

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असमी कवि बेजबरुआ का साहित्य साधना केंद्र ढहा

संबलपुर में हुई मूसलाधार बारिश से नेल्सन मंडेला चौक निकटस्थ असमी कवि लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ का एक मकान ढह गया। व्यवसाय के सिलसिले में सन 1920 में संबलपुर आए बेजबरुआ इसी मकान में अपना कार्यालय और साहित्य साधना केंद्र बनाया था। यहां रहने के दौरान उन्होंने असमी भाषा में कई पुस्तकों की रचना की। उनके यहां से जाने के बाद जिला प्रशासन ने उनके इस कार्यालय में राजस्व निरीक्षक कार्यालय शुरू कर दिया था। लेकिन देखभाल के आभाव में यह मकान काफी जर्जर हो चुका था। कवि बेजबरुआ की स्मृतियों की सुरक्षा के लिए ओडिशा और असम सरकार उनके आवास को म्यूजियम बनाने के लिया प्रयासरत है। इसके लिए लाखों रुपये अनुदान राशि मंजूर की गई है। लेकिन चौक के निकट स्थित कार्यालय की उपेक्षा किए जाने से यह बारिश की मार झेल नहीं सका और रविवार की सुबह ढह गया। 

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Posted By: Babita kashyap

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