जासं, संबलपुर (ओडिशा) : संबलपुरी व कोसली भाषा के जाने-माने कवि पद्मश्री डा. हलधर नाग को लेकर इंटरनेट मीडिया में एक गलत पोस्ट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट को लेकर नाग ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि उनके नाम पर किया गया पोस्ट पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है। ऐसे पोस्ट से वे काफी दुखी और आहत हैं। वायरल पोस्ट में कहा गया है कि पद्मश्री पुरस्कार लेने के लिए हलधर नाग के पास दिल्ली जाने के पैसे नहीं हैं और इस संबंध में सरकार को पत्र लिखकर नाग ने आग्रह किया है कि उनका पुरस्कार डाक से भेज दिया जाय।

नाग ने कहा कि शरारतपूर्ण तरीके से यह झूठी जानकारी वायरल की गई है। सच तो यह है कि उन्हें इस वर्ष नहीं बल्कि 2016 में पद्मश्री का पुरस्कार मिला था। 2016 में भी जब पद्मश्री पुरस्कार लेने के लिए उन्हें दिल्ली बुलाया गया था तब उन्होंने सरकार को अपनी गरीबी का हवाला देते हुए कोई पत्र नहीं लिखा था और न ही पदमश्री पुरस्कार को डाक से भेज देने की बात कही थी। लोककवि डा. हलधर नाग ने कहा कि पद्मश्री पुरस्कार से पहले से ही ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की ओर से उन्हें कलाकार भत्ता दिया जा रहा था। ओडिशा सरकार ने उन्हें रहने के लिए जमीन भी दी है, जिसपर बरगढ़ के एक डाक्टर ने अपने खर्च से मकान भी बनवा दिया है। वर्तमान में उन्हें सरकार की ओर से साढ़े 18 हजार रुपये का मासिक भत्ता भी मिलता है।

जागरण से बात करते हुए डा. नाग ने कहा कि 2016 में पद्मश्री पुरस्कार लेने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उन्हें पूरी सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। कार से उन्हें रायपुर ले जाया गया था और वहां से उन्हें विमान से दिल्ली ले जाने के बाद होटल में रखा गया। इस दौरान उन्हें दिल्ली में ओडिशा कैडर के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी उषा पाढ़ी और अरविद पाढ़ी ने भी सहयोग किया था।

वायरल पोस्ट को लेकर उन्होंने अ़फसोस जताते हुए बताया कि सोशल मीडिया में इनदिनों झूठे पोस्ट का बोलबाला है। कभी उन्हें पानी-भात खाते तो कभी चने बेचते दिखाकर बदनाम किया जाता है। ऐसे पोस्ट करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कभी-कभी तो उनकी आवाज की ऩकल करके भी पोस्ट अपलोड कर दिया जाता है। -----------

तीसरा कक्षा पास हलधर की कविताओं पर होती है पीएचडी पद्मश्री डा. हलधर नाग का जन्म 31 मार्च 1950 में बरगढ़ जिला के घेंस गांव के एक गरीब परिवार में हुआ था। नाग बहुत छोटे थे, तभी उनके पिता की मौत हो गई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि हलधर को पढ़ाया जा सके। ऐसे में वह तीसरी कक्षा तक की ही पढाई कर सके, लेकिन कविताएं लिखने का जुनून ऐसा सवार हुआ कि बहुत जल्द ही वह देशभर में मशहूर हो गए। बहुत लोग उनकी लिखी कविताओं पर पीएचडी कर रहे हैं। उनकी कई प्रसिद्ध रचनाओं को लेकर संकलित- हलधर ग्रंथावली- 2 कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल है।

Edited By: Jagran