जागरण संवाददाता, राउरकेला : गोपबंधुपाली की अमरनाथ बस्ती जहां सात सौ से अधिक परिवार निवास करते हैं। सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए आर्थिक मदद की पूरी राशि नहीं मिल पाई है। ऐसे में बस्ती के डेढ़ सौ से अधिक घरों में अब तक शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है। हालत यह है कि कुछ घरों में शौचालय निर्माण की जगह भी नहीं है। साथ ही यहां सामुदायिक शौचालय भी नहीं है। इससे उन्हें बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे लोग निकट के खुले मैदान या पास की पहाड़ी पर जाते हैं। खेत में पैर रखने की जगह नहीं है फिर भी वहां जाना लोगों की मजबूरी है।

अमरनाथ मंदिर के पास पांच दशक पहले बस्ती बसी है। एक हजार से अधिक परिवार के अधिकतर घरों में केवल एक दो कमरे हैं जहां लोग पूरे परिवार के साथ रहते हैं। घरों में शौचालय निर्माण के लिए जगह नहीं होने के कारण कुछ परिवार के लोग सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन में राशि स्वीकृत होने के बावजूद शौचालय का निर्माण नहीं करा पाए। सभी बस्तियों में सरकार की ओर से सुलभ व सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है पर यह बस्ती इस सुविधा से भी वंचित है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तालाब के किनारे व खुले खेत में रात के समय शौच के लिए जाना खतरे से खाली नहीं होता है फिर भी जाना मजबूरी है।

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शौचालय निर्माण के लिए घर में जगह कम होने के बावजूद सरकार की मदद मिलने से घर के एक किनारे पर शौचालय के लिए गड्ढा खुदवाकर काम शुरू किया। अब तक केवल दो हजार रुपये ही मिले हैं। अपने पैसे से इसका काम पूरा कराया।

-सनियार यादव।

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स्वच्छ भारत मिशन में शौचालय के लिए आवेदन किया था जिससे वर्क ऑर्डर मिला एवं पहले किस्त में केवल दो हजार रुपये मिले हैं। घर के अंदर गड्ढा खुदा होने के कारण अपना पैसा मिलाकर काम पूरा करना पड़ा। बाकी पैसा कम मिलेगा पता नहीं।

- गोलू यादव।

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खुले में शौच नहीं जाने के लिए लोगों को कहा जाता है पर शौचालय हो तब तो लोग बाहर न जाएं। सरकार से केवल तीन हजार रुपये मिला है इससे शौचालय बनाना संभव नहीं है। निगम के संबंधित विभाग को सुविधा देने पर ध्यान देना चाहिए।

- क्रांति दास।

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एक शौचालय बनाने में 15 से 20 हजार रुपये खर्च होते हैं। सरकार की ओर से आठ हजार रुपये देने की बात कही गई थी पर अब तक 5300 रुपये ही मिले हैं। जिस परिवार में कमाने वाला नहीं है वह पैसा कहां से लाकर शौचालय बनाएंगे।

- सत्यरंजन साहु।

Posted By: Jagran