संसू, बंडामुंडा : रेलवे के द्वारा अंग्रेजी शासन काल से चले आ रहे एक पदनाम को बदलकर ट्रेन के पीछे ड्यूटी जाने वाले गार्ड को ट्रेन मैनेजर पदनाम देने की घोषणा की गई है। इसका आल इंडिया गार्ड काउंसिल के केंद्रीय कोषाध्यक्ष देवोजित विश्वास और साउथ ईस्टर्न रेलवे जोनल सचिव देबाशीष मित्र ने स्वागत किया है। कहा है कि इस खबर से पूरे भारतवर्ष में गार्ड के पद पर काम करने वाले रेलकर्मियों में खुशी की लहर है। काउंसिल की तरफ से सभी ट्रेन मैनेजर को बधाई दी गई है।

अब रेलवे गार्ड को सम्मानित पद ट्रेन मैनेजर के रूप में पहचान मिली है। ट्रेन मैनेजर अपने अपने इलाकों में मिठाई बांटकर और पटाखे जलाकर अपने अस्तित्व की लड़ाई जीतने की खुशी माना रहे हैं। चाहे यात्री ट्रेन हो या फिर मालगाड़ी, ट्रेन के पीछे अकेला बैठा कर्मचारी ट्रेन पर पीछे से नजर बनाए रखता है। यात्रियों की सुरक्षा हो या फिर मालगाड़ी में लोड माल सभी की सुरक्षा का भी वह खयाल रखता है। विषम परिस्थिति में भी अपनी ड्यूटी को ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक संपन्न कर ट्रेन को गंतव्य मार्ग तक सुरक्षित पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब इस विषम परिस्थिति में काम करते हुए उन्हें गार्ड कहा जाता था तो उन्हें काफी मानसिक पीड़ा होती थी। उन्हें लगता था की उनके कार्य को बहुत छोटी निगाह से लोग देखते हैं, उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए उसकी कमी महसूस की जाती थी। लेकिन अब यह कमी दूर हो गयी है। रेलवे जैसे बड़े संस्थान में काम करने वाले लोगों को पदनाम से पहचान मिलती है। ट्रेन मैनेजर बनाकर जो सम्मान उन्हें दिया गया है, यह काबिले तारीफ है।

-देवोजित विश्वास, केंद्रीय कोषाध्यक्ष लंबे समय की मांग पूरी हुई है। अब रेलवे गार्ड कर्मचारियों को सम्मान पदनाम मिला है। ट्रेन मैनेजर के नाम से कर्मचारी भी काफी खुश है।

देबाशीष मित्र, दक्षिण पूर्व रेलवे जोनल सचिव।

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