कमल कुमार विश्वास, राउरकेला

साइबर अपराधी हर रोज नई तकनीक का उपयोग कर लोगों को ठगने में सक्रिय हैं। राउरकेला की साइबर पुलिस ने ठगी कर खाते से ट्रांसफर हुई राशि को ब्लॉक करने का रास्ता निकाला तो साइबर अपराधियों ने ठगी करने का नया रास्ता खोज लिया। ठगों ने मोबाइल पर लिक भेजकर फ्रॉड ट्रांजेक्शन करने का जरिया तलाश लिया है। ऐसे में इन दिनों पुलिस साइबर की इन नई जालासाजी से निपटने में जुटी है।

राउरकेला से भी ठगी का इस तरह का एक मामला सामने आ चुका है। अपने पुराने स्कूली दोस्तों के साथ बंधु मिलन में शामिल होने पिछले दिनों मुंबई से आया एक व्यक्ति इसी तरह ठगी का शिकार हो चुका है। साइबर अपराधियों ने उसके खाते से दस लाख से अधिक की राशि उड़ा ली है। ऐसे में साइबर पुलिस के लिए इस तरह के वारदातों से निपटना अब एक चैलेंज बनता जा रहा है।

साइबर थाना पुलिस के मुताबिक इस नयी तकनीक के जरिए ठग अपने टारगेट को विश्वास में लेकर उसके फोन पर एनी डेस्क एप या टीम टीम वीयूआर एप का लिक अलग नाम से भेजता है। उसे टच करते ही यह एप अपने आप फोन में डाउनलोड हो जाता है। इसके बाद कुछ अंकों का एक कोड जनरेट होता है। जिसे शेयर करने को कहा जाता है। जैसे ही कोड अपराधी के मोबाइल फीड हो जाता है तो टारगेट के मोबाइल का रिमोट कंट्रोल अपराधी के पास चला जाता है और वह टारगेट का मोबाइल डाटा चुरा लेता है। जिसके माध्यम से यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस के द्वारा भी फ्रॉड ट्रांजेक्शन करने में सफल हो जाता है।

2018 में खुला साइबर थाना, 19 मामले दर्ज, नौ का समाधान

राउरकेला में वर्ष 2018 में साइबर थाना खोला गया था। जिसमें अब तक 19 मामले दर्ज हो चुके हैं। 2018 में 10 मामले दर्ज हुए थे। जिसमें से पांच मामलों का पुलिस खुलासा कर चुकी है। जिसमें फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट के पांच में से तीन मामलों का समाधान हुआ है। जबकि फ्रॉड ट्रांजेक्शन के पांच में से एक का समाधान हुआ है। फ्रॉड ट्रांजेक्शन के महत्वपूर्ण मामले एटीएम क्लोनिग का था। अंतरराज्यीय गिरोह के दस लोगों को पुलिस गिरफ्तार हुए थे। इसी तरह 2019 में दर्ज नौ मामलों में से चार का खुलासा करने में पुलिस सफल रही थी। जिसमें छह फ्रॉड ट्रांजेक्शन के तथा तीन फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले थे। फेसबुक के दो मामले तथा फ्रॉड ट्रांजेक्शन को दो मामले पुलिस सुझा पाई है।

फ्रॉड ट्रांजेक्शन के मामले में पुलिस को होती है ज्यादा परेशानी

साइबर क्राइम में फ्रॉड ट्रांजेक्शन के मामले सुलझाने में पुलिस को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। ऐसे मामले में अगर शिकायतकर्ता सही समय पर पुलिस के पास पहुंच जाता है तो ट्रांजेक्शन मनी रोकने में सफलता मिल जाती है। लेकिन देर होने पर काफी परेशानी उठाना पड़ता है। राउरकेला की साइबर पुलिस अभी बड़े मामले को ही देख रही है। जबकि छोटे मामले आम थानों में दर्ज किए जाते है। साइबर थाने के पुलिस सूत्रों की माने तो एक-एक मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया में ही काफी समय लग जाता है। इसके अलवा पुलिस अभी साईबर के मामलों में और एडवांस हो रही है।

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साइबर थाना खुला 13 फरवरी 2018

वर्ष दर्ज केस खुलासा

2018- 10 -5

2019- 09 -4

Posted By: Jagran

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