जागरण संवाददाता, राउरकेला : जमीन संबंधित कार्य ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्र बनाने के लिए लोग तहसील कार्यालय पर ही निर्भर करते हैं। सीमावर्ती ब्लाक नुआगांव में तहसील निर्माण की घोषणा छह साल पूर्व सरकार की ओर से की गई थी पर अब तक यह कागज तक ही सीमित है। इस कारण तहसील से जुड़े काम के लिए नुआगांव के लोगों को 30 से 40 किलोमीटर दूर जाना बीरमित्रपुर जाना पड़ता है। यहां तक आवागमन का सुचारु साधन नहीं होने से लोगों को तमाम असुविधा के साथ-साथ पूरा दिन जाया होता है।

बीरमित्रपुर तहसील के अधीन नुआगांव ब्लाक में चार तथा बीरमित्रपुर में तीन समेत कुल सात राजस्व निरीक्षक कार्यालय हैं। नुआगांव ब्लाक में नुआगांव, हाथीबाड़ी, सोरडा व खुटगांव में राजस्व निरीक्षक काम कर रहे हैं। विभिन्न प्रमाणपत्र का काम ऑनलाइन होना चाहिए पर पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण आय, जाति, आवासीय, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र आदि के लिए नुआगांव अंचल के लोगों को बीरमित्रपुर तहसील कार्यालय आना पड़ रहा है। अंचल के सुदूरवर्ती गांव के लोगों को इसके लिए 40 किलोमीटर दूर दूर बीरमित्रपुर तक सफर मुश्किल हो जाता है। नियम के अनुसार जमीन पट्टा आवेदन के 72 घंटे के भीतर मिलना चाहिए पर यहां भीड़ अधिक होने के कारण समय पर प्रमाणपत्र तक नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं राजस्व विभाग बालू घाट, पत्थर व मुरुम- मिट्टी खदान पर भी नजर रखने में विफल साबित हो रहा है। इस कारण अंचल में इस कारोबार से जुड़े माफिया मालामाल हो रहे हैं। कीमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा भी आम बात हो गई है। राज्य सरकार की घोषणा के अनुसार शीघ्र तहसील कार्यालय नुआगांव में खोलने की मांग लंबे समय से की जा रही है पर इस दिशा में अबतक कोई पहल धरातल पर नजर नहीं आ रही है।

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