जागरण संवाददाता, राउरकेला : स्मार्ट सिटी में फास्ट फूड स्टॉल पर बिना लाइसेंस के बन रहे टमाटर व चिली सॉस परोसा जा रहा है। दो दिन पहले बणई में ब्रांडेड कंपनी का नकली सॉस पकड़ा गया था। इससे जहरीला व अखाद्य पदार्थ की बिक्री रोकने में महानगर निगम की निष्क्रियता स्पष्ट हो रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नियमित जांच नहीं की जा रही है। नकली व अखाद्य जब्त होने पर नमूना संग्रह कर जांच के लिए भेज कर औपचारिकता पूरी की जा रही है। कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होने से बस्ती क्षेत्रों में अस्वच्छ परिवेश में बड़े पैमाने पर सॉस तैयार किया जा रहा है और यह कुटीर उद्योग में तब्दील हो गया है।

बिना फूड लाइसेंस के अस्वस्थकर परिवेश में वर्षाें से सॉस तैयार कर बेचने का धंधा फल फूल रहा है एवं यह कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। इसका दाम कम होने के कारण फास्ट फूड की दुकानों में मांग अधिक है। शहर के गोपबंधुपल्ली, मधुसूदनपल्ली, लाठीकटा, जगदा, बंडामुंडा, बिसरा, प्लांट साइट, ट्रैफिक गेट समेत अन्य क्षेत्रों में नकली सॉस तैयार किया जा रहा है तथा ब्रांडेड कंपनी से मिलता जुलता नाम वाला लेबल लगाकर बेचा जा रहा है। इसका उपयोग चाउमीन, मंचूरियन, चिकन चिल्ली, एगरोल स्टॉल में अधिक किया जा रहा है। बाजार में सब्जी का दाम अधिक होने के कारण टमाटर सॉस बनाने में टमाटर की जगह कोहड़ा, आलू, पपीता, कद्दू का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें फ्लेवर डाले जाने के कारण गंध से यह पकड़ में नहीं आता। एक अनुमान के अनुसार, शहर में हर दिन 10 क्विंटल से अधिक नकली सॉस की खपत हो रही है। नामी कंपनी के सॉस की कीमत 80 रुपये से 250 रुपये तक है जबकि नकली सॉस 20 से 30 रुपये बोतल मिल जाता है। यहां तैयार किया गया सॉस सुंदरगढ़ जिले के शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य के शहरों में भी भेजा जा रहा है। यह 10-15 दिन रखे जाने से जहरीला भी हो सकता है। इससे उल्टी दस्त होने के साथ ही अल्सर, कैंसर तक हो सकता है। इसके बावजूद इसे बनाने व बेचने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं रखी जा रही है।

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