संवाद सूत्र, संबलपुर : देश में लॉकडाउन की वजह से संबलपुर में फंसे इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आइटीबीपी) के जवान निरंजन बारिक को इनदिनों काफी मुश्किलों में दिन गुजारना पड़ रहा है। बॉर्डर में दुश्मनों के साथ सामना करने वाले इस जवान को देशभर में घोषित लॉकडाउन की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मारवाड़ी युवा मंच को जब इस जवान के बारे में पता चला तो उसे खेतराजपुर स्थित मारवाड़ी पंचायती धर्मशाला में आश्रय दिया गया है और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। दैनिक जागरण से बातचीत में जवान निरंजन बारिक ने बताया कि वह मूलरूप से ओडिशा के ब्रहमपुर का है और व‌र्त्तमान उत्तराखंड के मातली स्थित आइटीबीपी की 12 वीं बटालियन में कार्यरत है। संबलपुर की अदालत में चल रहे एक पारिवारिक मामले को लेकर वह 22 मार्च को संबलपुर आया और एक होटल में रुका लेकिन 23 मार्च को होटल ने उसे बाहरी प्रदेश का बताकर निकाल दिया था। किसी तरह रात गुजारने के बाद वह 24 मार्च को अदालत में हाजिर हुआ। उसी रात देश भर में लॉकडाउन घोषित कर दिए जाने से वह ना तो अपने गाव ब्रहमपुर जा सका और ना ही ड्यूटी पर लौट सका। स्थानीय फाटक स्थित रेल स्टेशन में तीन दिन गुजारना पडा। इसी दौरान उसका कुछ सामान भी चोरी हो गया। शुक्रवार को मारवाड़ी युवा मंच के सदस्यों को इस बारे में पता चला तब उसे ले जाकर खेतराजपुर स्थित मारवाड़ी पंचायती धर्मशाला में रखा गया। जवान निरंजन की मानें तो उसने इस बारे में जिला के कई अधिकारियों से ब्रहमपुर तक जाने देने की गुहार की लेकिन सब ने लॉकडाउन का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। इधर, मारवाड़ी युवा मंच की ओर से बताया गया है कि देश की सेवा करने वाले जवान के लिए उनकी ओर से हरसंभव सहायता और सहयोग किया जाएगा।

उप्र के मथुरा में फंसे राउरकेला के 17 श्रमिक

गंगा सफाई प्रोजेक्ट में ठेका संस्था के अधीन काम के लिए उत्तर प्रदेश के मथुरा गए 17 श्रमिक वहां फंस गए हैं। ये सभी श्रमिक राउरकेला बंडामुंडा, लाठीकटा और आसपास के हैं। उन्हें खाने पीने का सामान नहीं मिल रहा है जिससे मुश्किल में है। इनके परिवार वालों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई गई है ।

मथुरा में फंसे राकेश कुमार भोई ने बताया कि बीते अक्टूबर में राउरकेला एवं आसपास के 30 श्रमिक उत्तर प्रदेश के मथुरा के लक्ष्मी नगर में काम करने गए थे। सभी त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अधीन गंगा सफाई प्रोजेक्ट में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लाट निर्माण के काम में नियोजित थे। लॉक डाउन की घोषणा से पहले 13 श्रमिक निकल चुके थे और वे राउरकेला पहुंच गए। जबकि 17 श्रमिक वहा फंस गए हैं। उन्होंने भी घर लौटने के लिए टिकट कटाया था, पर अचानक लॉक डाउन के कारण ट्रेन आदि बंद होने के कारण वे वहां फंस गए। दुकान बाजार बंद होने कारण उन्हें खाद्य सामग्री तक नहीं मिल पा रही है।

झारखंड की गर्भवती बच्चे के साथ राउरकेला में फंसी

देशव्यापी लॉक डाउन में झारखंड राज्य के लोहरदगा की दिव्यांग गर्भवती महिला शाहीन अपने 6 साल के बेटे हनीफ राजा के साथ 22 मार्च से राउरकेला में फंसी हुई है। वह स्टेशन के बाहर दुकान के चबूतरे में लोगों से प्रदत्त भोजन के सहारे दिन गुजार रही है। उक्त महिला का पूरा ब्योरा दैनिक जागरण की ओर से एडीएम अबोली सुनील नरवाने तथा जिलापाल निखिल पवन कल्याण को उनके व्हाट्सएप में तस्बीर के साथ मुहैया कराने के बाद शनिवार को प्रसासन ने महिला और उसके बेटे को राऊरकेला सरकारी अस्पताल परिसर स्थित आश्रय स्थल में रहने और खाने की व्यवस्था करायी। लॉक डाउन खत्म होने तक महिला को सुविधा दिए जाने की बात कही गई है।

Posted By: Jagran

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