लुधियाना, राजेश शर्मा। आस्था और श्रद्धा का कोई मोल नहीं होता..17 दिसंबर को लुधियाना में निकलने वाली रथयात्रा के लिए पुरी धाम में जून में निकाली गई रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के रथ में लगे पहिये को 6 लाख रुपये में ख्ररीदा गया है। श्री गोविंद गोधाम की भगवान जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव कमेटी ने इसे ई ऑक्शन में खरीदा है। 

 

पहली बार यह सौभाग्य लुधियाना को मिला है। अब तक पुरी धाम से रथयात्रा का कोई पार्ट्स बाहर नहीं गया है। ओडिशा के पुरी धाम में आयोजित होने वाले भगवान श्री जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान जिस रथ पर साक्षात भगवान ने सवार होकर विश्वभर से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन देकर कृतार्थ किया उसके पावन पहिए को पुरी से लुधियाना पहुंचने की कहानी भी बड़ी रोचक है। इसके लिए कमेटी ने ई-ऑक्शन में 6 लाख रुपये की कीमत चुकाई। इसे विशेष ट्रक से पुरी से लुधियाना लाया गया। पहुंचने में छह दिन का समय लगा। इस दौरान साथ पूरे रास्ते में संकीर्तन मंडली भगवान जगन्नाथ का गुणगान करती रही।

 

पुरी धाम से रथ का पहला हिस्सा पहली बाहर भेजा गया 

गो सेवक सतीश गुप्ता का दावा है कि पुरी धाम में निकलने वाली रथयात्रा में उपयोग होने वाले रथ का यह पहला पार्ट्स है जिसे पुरी से बाहर भेजा गया। यात्रा केबाद रथ के पार्ट्स अलग-अलग कर दिए जाते हैं। प्रबंधन कमेटी द्वारा इसकी ई-ऑक्शन करवाई जाती है। भक्तजन इसे खरीद कर वहीं अर्पित करके चले जाते हैं, लेकिन लुधियाना में आयोजित होने वाली विशाल रथयात्रा के चलते इस पावन पहिए को पहली बार लुधियाना लाने की अनुमति मिली।

 

पुरी से लुधियाना लाए गए पहिए का वजन 300 किलो है। वैसे साक्षात भगवान जगन्नाथ जिस पावन रथ पर सवार हों वह तो वैसे ही खास हो जाता है। इसके बावजूद इसे बनाने की प्रक्रिया भी बेहद विशेष है। परम्परा है कि पुरी धाम के मुख्य पुजारी के स्वप्न में जैसे वृक्ष दिखते हैं, उनको ढूंढकर उसी की लकड़ी से रथ के अधिकांश पाटर््स तैयार होते है। विशेष तरह के कारीगर बिना किसी मशीनरी के उपयोग के इस भव्य रथ को अपने हाथों से तैयार करते है। रथ के कुल 24 पहियों में से प्रत्येक का वजन 300 किलो होता है।

 

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Posted By: Babita Kashyap