भुवनेश्वर, जेएनएन। श्रीमंदिर रत्न भंडार जांच के लिए राज्य सरकार ने भी अनुमति दे दी है। राज्य कानून विभाग की तरफ से श्रीमंदिर कार्यालय को इस संबंध में भेजा गया पत्र मंगलवार को श्रीमंदिर प्रशासनिक कार्यालय में पहुंच गया है। श्रीमंदिर के नियम अनुसार रत्न भंडार को खोला जाएगा।

रत्न भंडार को किस प्रकार से एवं किसकी उपस्थिति में खोला जाएगा, वह सब इस पत्र में उल्लेख किया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 1978 एवं 1984 में रत्न भंडार को खोला गया था। उस समय के सभी नियम का अनुपालन करने के लिए सरकार की तरफ से निर्देश जारी किया गया है। आगामी 29 मार्च की छत्तीसा निजोग की बैठकमें यह निर्णय लिया जाएगा कि किस दिन रत्न भंडार खोला जाएगा। रत्न भंडार खोलने को लेकर पिछले 22 मार्च को हाईकोर्ट से निर्देश मिलने के बाद करोड़ों जगन्नाथ भक्तों के मन में जिज्ञासा बढऩे लगी है। रत्न भंडार के अंदर पुरातत्व विभाग, कोर कमेटी सदस्य एवं सेवायत प्रवेश करेंगे। इनके शरीर पर धोती एवं गमछा के अलावा शरीर में अन्य कोई भी आभूषण नहीं होगा, अंगूठी या अन्य कोई भी श्रृंगार के सामान नहीं पहन सकते हैं। केवल चश्मा प्रयोग करने की अनुमति दी जाएगी। उसी तरह खदान इलाकों में जिन लाइटों का प्रयोग किया जाता है, उन्ही एलईडी लाइट को इनके सिर में लगाया जाएगा।

सुरक्षा के मद्देनजर सतर्कता के हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इस दौरान श्रीमंदिर के बाहर एक एंबुलेंस, डाक्टर एवं स्नेक हेल्प लाइन को तैनात रखा जाएगा। इस संबंध में 28 मार्च को शाम को श्रीमंदिर संचालन कमेटी की एक बैठक हुई। 

उसी तरह 29 मार्च को छत्तीसा निजोग की बैठक होगी। दोनों कमेटी की बैठक में जो निर्णय लिया जाएगा, उसी आधार कर रत्न भंडार की जांच की रूपरेखा तैयार की जाएगी। श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक प्रदीप कुमार जेना ने कहा है कि रत्न भंडार खोलने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मिल गई है। अब छत्तीसा निजोग की बैठक के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। भक्त एवं श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि आखिर रत्न भंडार में प्रवेश कौन करेगा। भगवान शिवशंकर के प्रिय नाग साप भी रत्न भंडार में है और इसके अलावा कई जहरीले नाग सांप यहां हो सकते हैं। 1978 एवं 1984 में इससे पहले जब रत्न भंडार खोला गया था। उस समय कई जहरीले  सांप निकले थे। ऐसे में रत्न भंडार में प्रवेश करते समय स्नेक हेल्प लाइन को बुलाया जाएगा।

Posted By: Babita