भुवनेश्वर, जागरण संवाददाता। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ जी के रत्न भंडार की जांच प्रक्रिया देर शाम खत्म हो गई है। जांच के बाद बाहर लौटे तड़ऊकरण (सेवायत) हिमांशु पटनायक ने मीडिया से बातचीत में बताया कि विधि के मुताबिक जांच कार्य संपन्न हो गया है। केवल बाहर रत्न भंडार की जांच हुई है। बाहर से ही भीतर भंडार की छतों को लाइट के जरिए देखा गया। छत में दरार दिखाई दे रही थी और दीवारों में सीलन नजर आई। 

श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक ने बताया कि जरूरी जांच के बाद टीम के सदस्य अंदर गए थे। गजपति महाराज के प्रतिनिधि, नीति प्रशासक एवं भंडार मेकाप ने ताला खोला। रत्न भंडार में प्रवेश करने के बाद सर्च लाइट से बाहर का रत्न भंडार देखा गया है। अंदर काफी जाला इत्यादि होने से झाड़ू लगाकर उसकी सफाई की गई। दीवार एवं छत को हाथ लगाकर देखा गया तो गीली थी। बाहर रत्न भंडार के झरोखा से अंदर का रत्न भंडार दिखाई दे रहा था। हालांकि जेसी मित्र के अस्वस्थ हो जाने के बाद वह बाहर निकल आए थे। 

जानकारी के अुनसार रत्न भंडार पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को त्रिस्तरीय सुरक्षा के बीच खोला गया। विधि-विधान से भगवान लोकनाथ की पूजा-अर्चना करने के बाद पहले से तय सदस्यों में से 16 लोगों को श्रीमंदिर में प्रवेश कराया गया। 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले मई 1978 में महाप्रभु का रत्न भंडार खोला गया था और तकरीबन 70 दिनों की गिनती के बाद रत्नों की सूची तैयार की गई थी। वैसे आम श्रद्धालुओं में महाप्रभु के रत्नभंडार में सोने, चांदी, वेशभूषा कीमती रत्नों का खजाना होने की बात होने का कयास लगा रहे हैं। महाप्रभु के सोनावेश में भक्तों को इनकी कुछ बानगी देखने को मिल जाती है। खबर के मुताबिक रत्नभंडार में तकरीबन 367 प्रकार के रत्नजड़ति आभूषण हैं।

 

Posted By: Babita