पुरी, जागरण संवाददाता : शुक्ल पंचमी पर कुराल पंचमी पर्व कुम्भकार बस्ती के हर घर में श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर इष्टदेव की आराधना की जा रही है और बर्तन गढ़ने की सामग्री का पूजन-अर्चना हो रही है।

कुम्हारपड़ा, अठरनला, चारीनला, जेनापुर आदि कुम्भकार बस्तियों में इस पूजा की धूम है। कुम्भकार नए वस्त्र धारण कर इस पर्व का पालन कर रहे हैं। कुम्भकारों ने मिट्टी में बर्तन निर्माण बंद कर दिया है। झोटी चिता के साथ विभिन्न व्यंजन खाद्य प्रस्तुत कर पड़ोस में बांटने के साथ खुद आहार कर रहे हैं। इष्ट देव रुद्रपाल और इष्ट देवी रत्नेश्वरी की मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना की जा रही है। विभिन्न पुराणों में कुम्भकारों के सृष्टि और कुराल पंचमी के महात्म्य के बारे में वर्णित है। भक्त कवि दीन कृष्ण दास द्वारा लिखित कुराल पुराण में वर्णित तत्व के अनुसार मानव जगत की सृष्टि के बाद खाना तैयार करने के लिए पात्र की आवश्यकता हुई थी। देव ऋषि नारद को भगवान विष्णु ने इस विषय पर जानकारी दिया था। कुछ क्षण के लिए भगवान विष्णु चिंता प्रकट करने से उनके माथे से पसीने की कुछ बूंद गिरी थी। इससे एक दिव्य पुरुष का उदय हुआ। भगवान विष्णु उस दिव्य पुरुष को मिट्टी का बर्तन बनाने के लिए आदेश दिए थे। इस पात्र को बनाने के लिए भगवान विष्णु उन्हें सुदर्शन चक्र, गदा, पद्म और जनेऊ प्रदान किए थे। ये दिव्य पुरुष रुद्रपाल के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनके वंश को बढ़ाने के लिए ब्रह्मंा ने सुंदर कन्या उत्पन्न की जिसका नाम रत्नेश्वरी था। इस तरह रत्नेश्वरी और रुद्रपाल का अर्विभाव हुआ था। इसीलिए कुम्भकार भक्ति व श्रद्धा के साथ कुराल पंचमी पर्व मनाते हैं।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर