पुरी : जानकारी के अनुसार सन् 1842 में श्रीमंदिर के ऊपर से पत्थर गिरा था। फिर 9 जुलाई 1875 को श्रीमंदिर से पत्थर गिरा था। इसके बाद सन् 1937 में गर्भगृह से पत्थर गिरकर महाप्रभु के भोग के लिए स्थित सोने की थाली चूर चूर हो गई थी। 4 नवम्बर 1939 को गर्भ गृह से रत्न सिंहासान से पत्थर गिरा था। 27 जनवरी 1961 को 10 किग्रा. वजन का का पत्थर रत्न सिंहासन पर बांधे गए चांदुआ पर गिरा था। 22 जनवरी 1969 को श्रीमंदिर के बाहर पा‌र्श्व से एक बड़ा पत्थर गिरा था। 14 अगस्त 1975 को दक्षिण गृह के ऊपर से एक चूना का लेप गिरा था। इसके बाद सन् 1979 में मंदिर से पत्थर गिरा था। 14 अगस्त 1985 को दक्षिण घर से चुना गिरा था। 6 फरवरी 1990 को भोग मण्डप से चुना गिरा था। 14 जून 1990 को 5 टन वजन का विशाल पत्थर अवंला बेढ़ा से गिर गया था। 13 अगस्त 1992 को गर्भ गृह के छत से 1 टन वजन के 2 पत्थर गिरे थे। इसके कारण विग्रहों को 29 नवम्बर 1992 को अस्थाई सिंहासन को स्थानान्तरित करना पड़ा था। 2004 के फरवरी में जय विजय द्वार के ऊपरी भाग से चूना गिरा था। सन् 2006 में दक्षिण द्वार गुमुट और सन् 2011 के नवम्बर में पश्चिम द्वार के गुंबद से पत्थर गिरा था।

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