जागरण संवाददाता, पुरी :

राजस्व विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण सिप सिरुबाली मौजा की सरकार द्वारा अधिगृहीत 1429 एकड़ कीमती जमीन, माफियाओं के कब्जे में चली गई है। 1400 करोड़ रुपये मूल्य की इस जमीन के 500 लोग रैयती मालिक थे। प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह जमीन अब भू-माफियाओं के कब्जे में है। यही नहीं, यहां माओवादियों ने अपना गढ़ बना लिया है। इससे स्थानीय लोग आतंकित हैं।

चकबंदी अधिकारियों के मुताबिक सिप सिरुबाली मौजा की 1429 एकड़ जमीन सरकारी खाते में आने के बाद इसके उपयुक्त रखरखाव के लिए कोई कदम नहींउठाया जा रहा है। जमीन माफियाओं ने समुद्र के तटवर्ती जंगल की जमीन पर जबरन दखल करने के साथ रोज करोड़ों रुपये के पेड़ काट बेच रहे हैं। इससे तटीय जंगल नष्ट हो रहा है। गौरतलब है कि झाऊं और काजू के पेड़ों की बहुतायत वाला यह तटीय जंगल, बाढ़ और समुद्री ज्वार से बचाने के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रहा था। बेलाभूमि से जुड़ा हुए इस जंगल के अंदर दुर्लभ प्रजाति के पशु-पक्षी न होते हुए भी उनके लिए जल संग्रह जरूरी होने का तर्क देते हुए गैरकानूनी तरीके से बड़े-बड़े तालाब खोदे जा रहे हैं। राजस्व विभाग या वन ंिवभाग के तरफ से इसे रोका भी नहींजा रहा है। हर दिन 100 से ज्यादा ट्रक और ट्रैक्टर में जंगल से मूल्यवान पेड़ कटकर पुरी शहर को भेजे जा रहे हैं। पुलिस वन विभाग, राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने सब जानकर चुप बैठे हैं। राज्य सरकार की तरफ से स्वतंत्र पर्यटन प्रकल्प सामुका बीच के लिए अधिगृहीत की गई यह जमीन कुछ दिनों में लकड़ी चोरों के कब्जे में पूरी तरह चली जाएगी। संडपुर के साथ 25 गांव के अधिवासियों को लेकर तटीय जंगल जमीन सुरक्षा समिति बनाई गई है। सराकारी जमीन के साथ व्यक्तिगत मालिकाना में मौजूद जमीन को कब्जा करने को यह संगठन तत्पर हुआ है। गौरतलब है कि कागज में सरकारी दखल को ली गई जमीन के चारों तरफ दीवार बनाने के लिए जिला प्रशासन के तरफ से एकाधिक बार किया गया प्रयास विफल हुआ है। सुरक्षा समिति के नेतृत्व में गांव के अधिवासियों ने 10 प्लाटुन पुलिस को संपृक्त जमीन से भगा दिया है। 2011 नवम्बर में इस मौजा के 1307 एकड़ जमीन और पिछले महीने के 12 तारीख को दूसरे पर्याय में 122 एकड़ जमीन सरकारी खाता में लिया गया है। लाल कपड़ा जमीन के ऊपर लगाकर सरकार जमीन कब्जा में लेने की घोषणा करती है, लेकिन बाद में जमीन दलाल जंगल माफिया झाऊं, आम, कटहल, काजू जंगल को ध्वंस कर देते हैं। पर्यटन शिल्प के विकाश के कारण बेलाभूमि पास स्थित जमीन का मूल्य अधिक होने से इस जमीन को कब्जा करने के लिए सभी प्रकार का प्रयास जारी है।

जंगल, जमीन सुरक्षा की आड़ में माओवादियों के समर्थन हासिल के लिए अत्यन्त गोपनीयता के साथ उद्यम चलने की बात सूत्रों से जानने में आई है। सरकार अब से जागरूक होकर इस जमीन के सुरक्षा नहीं करती है तो कुछ ही दिनों में संपृक्त इलाका माओवादियों का अड्डा बन जाएगा। 3400 एकड़ जमीन के मालिकाना के बारे में सिविल कोर्ट अंतिम निर्णय न करने तक सरकारी खाते में गई जमीन के सुरक्षा के साथ अपने कब्जे में सरकार को रखने के लिए लोग मांग कर रहे हैं।

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