जागरण संवाददाता, पुरी :

बीते 10 साल से सिप सिरुबाली मौजा को लेकर विवाद चल रहा है। पुरी के तटीय इलाके में स्थित इस मौजा के 500 से ज्यादा लोगों के सामने सिर छिपाने का संकट सामने आ गया है। दरअसल, सरकार ने इस मौजा की 3400 एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर ली है। सरकार की इस इलाके में सामुका पर्यटन प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना है। भूमि एवं राजस्व विभाग की ओर से अधिग्रहीत जमीन पर लाल झंडा लगाकर उक्त भूखंड को सरकारी घोषित कर दिया गया है। मगर अधिकारियों की लापरवाही से प्रभावशाली लोगों ने इस जमीन पर कब्जा जमा लिया है। यह लगे करोड़ों रुपये के मूल्यवान पेड़ काटकर लकड़ी बेची जा रही है। बावजूद सबकुछ जानते-समझते, वरिष्ठ अधिकारियों का रवैया संदिग्ध है। इस जमीन को लेकर मौजा के लोग लगातार विरोध दर्ज कराते आ रहे हैं।

सिप सिरुबाली मौजा में करोड़ों की जमीन के चारों तरफ चाहरदीवारी बनाने के लिए जिला प्रशासन का प्रयास सफल नहीं हो पाया है। 2011 के नवम्बर में सरकार ने 1307 एकड़ जमीन कब्जे में ली थी। बीते 12 सितंबर को और 122 एकड़ जमीन सरकारी खाते में ले ली गई है। सरकार की तरफ से जमीन की निगरानी न होने के कारण जंगल नष्ट हो रहा है। इससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है।

बीते एक साल के अंदर सिप सिरुबाली मौजा की 1429 एकड़ जमीन सरकारी खाते में लिया गया है। इसका आनुमानित मूल्य 1400 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। दिलचस्प यह कि उक्त जमीन सरकारी होने की घोषणा की जा रही है, मगर एक इंच भी जमीन, सरकार के कब्जे में नहीं है।

गौरतलब है कि समुद्र किनारे स्थित यह जंगल समुद्री ज्वार को नियंत्रित करने में सहयोग करता था। लोगों की जमीन लेने के बाद प्रशासनिक अधिकारी उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए मौका भी नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि लोगों के खिलाफ दिए गए आदेश की नकल भी नहीं मिल रही है। उल्लेखनीय है कि 1927 साल में 70 नंबर खाता में इस मौजा की 3418 एकड़ 62 डिसिमिल जमीन थी, उसमें से 66 भूमि स्वामियों के नाम पर 2823 एकड़ 53 डिसिमिल 1977 चकबन्दी के समय रिकार्ड की गई है। हालांकि तत्कालीन जिलाधीश की तरफ से 500 एकड़ से अधिक जमीन की सरकार के नाम कर चकबंदी कोर्ट में मामला दायर कर दिया गया। वरिष्ठ वकीलों ने इसे कानूनन गलत बताया है।

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