जागरण संवाददाता, पुरी :

शुक्रवार को तीनों रथ सिंहद्वार के सामने पहुंच जाने के बाद आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि में आज महाप्रभु के प्रसिद्ध सोने का वेश किया गया। इस वेश के देखने के लिए लाखों श्रद्धालुओं का समागम हुआ। मौसम अनुकूल रहने से महाप्रभु के इस मनोरम वेश को देखने के लिए राज्य तथा राज्य बाहर के दर्शनार्थियों का हुजूम उमड़ा था। सोने वेश के लिए बड़तढ़ाऊ यानी सोना वेश का दर्शन करने के लिए जुटी श्रद्धालुओं के भीड़ से श्रीक्षेत्र उत्सव मुखर हो उठा है। बाहुड़ा यात्रा के बाद लोग शहर से वापस नहींलौटे हैं। अपराह्नं के समय महाप्रभुओं के सोने का वेश होने का कार्यक्रम निश्चित किए जाने के बावजूद वेश आरंभ होने से पहले रथ के चारों तरफ लाखों श्रद्धालु जमा हो गए थे। आज परंपरा अनुसार तीनों रथ पर मंगल आरती, मइलम, तड़पलागी, वेश, गोपाल बल्लभ भोग, सकाल धूप, मइलम, जात्रांगी महास्नान, वेश, मध्याह्नं धूप, मइलम, संध्या आरती आदि नीति 3:45 बजे के अन्दर खत्म होने के बाद अपराह्नं 4 बजे महाप्रभु के सोने का वेश आरंभ हुआ था। 5:30 बजे महाप्रभु को सम्पूर्ण वेश में सजा दिया गया। पुष्पालक, खुण्टिया, दइतापति, तलुच्छ और भीतरछ सेवायतों ने दारू विग्रहों को सोने के वेश में सज्जिात करवाए थे। नाना स्वर्ण अलंकार और आयुध में महाप्रभुओं को बड़तढ़ाऊ वेश में सज्जिात किया गया था। इस वेश के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रीमंदिर के रत्न भण्डार से स्वर्ण आभूषण और आयुध लाया गया था। हजारों दर्शक श्रीमंदिर से वेश के लिए अलंकार और आभूषण लाए जाने का दृश्य देख रहे थे। कुंतल-कुंतल सोने में तीनों महाप्रभु को सजाया गया। स्वर्ण अलंकार आभूषण और आयुध के साथ विभिन्न पुष्प अलंकार से सजाया गया । श्री जगन्नाथ, प्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा के वेश दर्शन के लिए सिंहद्वार व श्रीमंदिर के चारों तरफ तथा पूरा बड़दाण्ड जन सैलाब से भर उठा था। करीबन 10 लाख लोग महाप्रभुओं के सोने के वेश का दर्शन किए थे। रात के 10:30 बजे तक महाप्रभु का वेश रहा था। तीनों रथ के नीचे एक तरफ से घूमकर लाखों श्रद्धालु चलकर महाप्रभुओं के सोने के वेश का दर्शन कर रहे थे।

इस वेश में महाप्रभु बलभद्र, सोने से निर्मित श्री पयर, श्रीभुज, किरिटी, ओड़ियानी, कुण्डल, चन्द्र सूर्य, आड़कानी, घागड़ामाली, कदम्बमाली, तिलक, चंद्रिका, अलका, झोबाकण्ठ, बाहाड़ामाली, बाघनखी माली, सेवती माली, त्रिखण्डिका, कमरपट्टी में सज्जिात हुए थे। बलभद्र के दोनों श्री हस्त में शोभा पा रहा था हल और मुसल। श्री जगन्नाथ जी को सुवर्ण श्री पयर, श्रीभुज, किरिटी, ओड़ियानी, चन्द्रसूर्य, आड़कानी, कर्ण, घाघड़ामाली, कदम्ब माली, झोबा कण्ठी, हरिणा कदम्बमाली, बाहाड़ामाली, तिलक, चन्द्रिका अलका, ताबीजमाली, सेवती माली और त्रिखण्डिका कमरपट्टी में सजाया गया था। श्री जगन्नाथ दोनों हाथों में सोने का चक्र और चांदी का शंख धारण किए थे। देवी सुभद्रा को किरटी, ओड़ियानी, कान, चन्द्र सूर्य, घाघड़ामाली, कदम्बमाली, सेवती माली में सज्जिात किया गया था। सुभद्रा दो तड़गी या आयुध में सज्जिात हुई थी। सभी अलंकार, आभूषण और आयुध में सज्जिात सिद्ध ग्रहों के दर्शन के लिए शाम होने के बाद दर्शनार्थियों की संख्या कई गुना बढ़ गई थी। वेश में रहते हुए श्री विग्रहों की आरती की गई थी। समुद्र के तरंगमाला के तरह शहर के चारों दिशा से इसवेश के दर्शन को सिंहद्वार के सामने भक्तों का तांता लगा था। बड़दाण्ड पूरी तरह भक्तों से सट गया था। दर्शनार्थी बैरिकेड के जरिए एक मुखी रास्ते में प्रवेश और प्रस्थान कर रहे थे। शांति श्रृंखला रक्षा और जनसमागम को पुलिस विभाग की तरफ से रैपिड एक्शन फोर्स तैनात किया गया था। उज्जवल आलोक के रोशनी में रथ की चारों दिशाएं सुशोभित हो रही थी। सोनावेश में सज्जिात महाप्रभुओं के विग्रह भक्तों के आंखों को झलसा दे रहा था। रथयात्रा और बाहुड़ा यात्रा की तूलना में इस साल सोने वेश में काफी ज्यादा दर्शनार्थियों का समागम हुआ है। केन्द्रांचल राजस्व आयुक्त तथा श्री मंदिर के मुख्य प्रशासक डा.अरविन्द पाढ़ी, उपमुख्य प्रशासक अरविन्द अग्रवाल, आरक्षी अधीक्षक अनूप साहू तथा अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहकर सभी व्यवस्था को देख रहे थे। रथ के ऊपर लोगों ने अच्छी तरह से वेश दर्शन करने को दइतापति निजोग के अध्यक्ष रामकृष्ण दासमहापात्र, संपादक प्रेमानंद दासमहापात्र, जगन्नाथ जी के बाड़ग्राही, जगन्नाथ स्वांई महापात्र, रामचन्द्र दास महापात्र, विनायक दास महापात्र, जयकृष्ण दास महापात्र, गुणधर दास महापात्र प्रमुख उपस्थित रहकर सभी प्रकार की व्यवस्था ग्रहण किए थे। रात के 11 बजे के बाद महाप्रभुओं का ओलागी हुआ था।

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