पुरी, जागरण संवाददाता

लम्बे जद्दोजहद और मठाधीशों के प्रतिवाद के बीच सिंहद्वार के समीप बड़छटा मठ का अवैध कब्जा हटाने का कार्य प्रशासन ने गुरुवार को शुरू किया। हाईकोर्ट के निर्देश पर मेघनाथ दीवार की सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई शुरू की गई है। गौरतलब है कि मान्यवर हाईकोर्ट के न्यायाधीश विमल प्रसाद दास और संजू पण्डा को लेकर गठित खण्डपीठ ने बड़छटा मठ की तरफ से की गई एक रीट पिटीशन पर विचार करते हुए मेघनाथ दीवार से 10 फुट के अन्दर कोई भी निर्माण कार्य न रहने का निर्देश दिए हैं। उपजिलाधीश उधव चरण माझी, सिटी डीएसपी असीमा नंद त्रिपाठी और तहसीलदार की उपस्थिति में जबरदखल हटाओ कार्य चल रहा है। एएसआई की तरफ से उच्छेद कार्य किया जा रहा है और जिला प्रशासन की तरफ से सभी प्रकार का सहयोग दिया गया है। इस उच्छेदकार्य को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु बड़दाण्ड पर जमा हुए। उच्छेद अभियान का विरोध करते हुए मठ के कोठारी बलराम दास ने अभियोग किया है कि हाईकोर्ट की राय के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील करने को जिला प्रशासन मठ को समय नहीं दे रहा है। प्रशासन अन्याय कर रहा है। मठ को महाप्रभु श्री जगन्नाथ के सेवा से उच्छेद करने के लिए धमकियां दी जा रही हैं। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के निर्देश के प्रतिवाद में निखिल उत्कल मठ मंदिर सेवा संघ के अध्यक्ष स्वामी अरूपा नंद के नेतृत्व में मठाधीशों ने मठ के सामने धरना प्रदर्शन किए थे। जिला प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। केन्द्रांचल राजस्व आयुक्त और श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक प्रदीप्त कुमार महापात्र इस बारे में गणमाध्यम से कहा है कि मान्यवर हाईकोर्ट के निर्देश का पालन किया जा रहा है। निर्देश के ऊपर सवाल करने का अधिकार जिला प्रशासन के पास नहीं है। पहले से छता मठ एक छतरी के नीचे चल रहा था, जो आज दो मंजिला बन गया है। श्रीमंदिर के सिक्योरिटी को देखते हुए मान्यवर हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है। बाद में मेघनाद दीवार के पास मौजूद रामदया परिषद के निर्माण को भी हटाया जाएगा।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस